दिल्ली में HIL की 5 एकड़ प्राइम जमीन की होगी ई-नीलामी, बेस प्राइस 829 करोड़ रुपये
नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन दिल्ली के नजफगढ़ में HIL की 5.119 एकड़ जमीन की ई-नीलामी कर रहा है। जानें पूरी डिटेल।

देश की राजधानी दिल्ली में एक बेशकीमती जमीन के टुकड़े को लेकर निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है। नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) ने हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (HIL) के स्वामित्व वाली 5.119 एकड़ जमीन की ई-नीलामी की तैयारी कर ली है। इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को जोड़ने के लिए हाल ही में एक प्री-बिड मीटिंग का आयोजन किया गया, ताकि बोली लगाने वाले लोग जमीन की खासियत और नियमों को अच्छी तरह समझ सकें।
NLMC के सीईओ रोहन चंद ठाकुर ने इस मौके पर बताया कि इस निवेश रोड शो का मुख्य उद्देश्य बाजार के बड़े खिलाड़ियों को आकर्षित करना है। उन्होंने साफ किया कि आने वाले कुछ हफ्तों में अगर निवेशकों के मन में इस जमीन या नीलामी प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल या शंका है, तो वे बेझिझक NLMC या HIL से संपर्क कर सकते हैं।
नजफगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में है यह बेशकीमती जमीन
यह जमीन दिल्ली के नजफगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित है, जो शिवाजी मार्ग और रोहतक रोड के किनारे बसी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगभग 140 मीटर का डायरेक्ट रोड फ्रंट मिलता है और दिल्ली मेट्रो की ग्रीन लाइन की वजह से यहां ट्रांसपोर्ट की बेहतरीन सुविधा है। इस जमीन की रिजर्व प्राइस यानी बेस प्राइस 829.69 करोड़ रुपये तय की गई है।
सीईओ रोहन चंद ठाकुर ने जमीन की कानूनी स्थिति पर जोर देते हुए कहा कि रियल एस्टेट में अक्सर टाइटल और मालिकाना हक को लेकर विवाद होते हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। चूंकि यह जमीन पूरी तरह से सरकारी स्वामित्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (HIL) की है, इसलिए इसके टाइटल्स पूरी तरह साफ हैं। साथ ही, इस जमीन पर फिलहाल कोई निर्माण नहीं हुआ है, जिससे यह नए विकास के लिए एकदम तैयार है।
विकास की संभावनाओं पर बात करते हुए बताया गया कि दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत यहां फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) 400 तक हो सकता है। इलाके की डिमांड को देखते हुए डीएलएफ (DLF) जैसी बड़ी कंपनियों ने इसके पास पहले ही रेजिडेंशियल कॉलोनी बना ली है। इस नीलामी में ओमेक्स, गोदरेज और वर्चुअल रियल्टर्स जैसे बड़े दिग्गजों ने भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है।
गौरतलब है कि यह पिछले दो महीनों में NLMC द्वारा घोषित तीसरी ई-नीलामी है। केंद्र सरकार की यह योजना सार्वजनिक उद्यमों की उन संपत्तियों का मुद्रीकरण (monetization) करने की है, जो उनके मुख्य व्यवसाय के काम की नहीं हैं और सरप्लस पड़ी हैं।