नरेला और अमृतसर मंडी में भारी बारिश का कहर, खुले में रखा अनाज बर्बाद

दिल्ली के नरेला और पंजाब के अमृतसर में गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। भारी बारिश के कारण इन मंडियों में खुले में रखा अनाज पूरी तरह भीग गया, जिससे फसलें खराब हो गई हैं। नरेला मंडी अनाज नुकसान की यह खबर उन किसानों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने अपनी मेहनत की फसल को बेचने के लिए दूर-दराज के इलाकों से यहाँ पहुँचाया था।
नरेला की न्यू ग्रेन मार्केट में उत्तर प्रदेश के एटा और जलेश्वर जैसे इलाकों से आए किसान अपनी फसल लेकर पहुँचे थे। लेकिन मंडी में पर्याप्त टिन शेड और सुरक्षात्मक टेंट न होने की वजह से उनकी फसल बारिश की चपेट में आ गई। किसानों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए होते, तो उनकी फसल बर्बाद होने से बच जाती।
मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की लापरवाही
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को दिल्ली क्षेत्र में गरज-चमक, बिजली और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं का पूर्वानुमान जताया था। चेतावनी के बावजूद मंडियों में अनाज को सुरक्षित रखने के पुख्ता इंतजाम नहीं थे।
इस घटना के बाद अब किसानों में भारी आक्रोश है और वे सरकार से उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। अमृतसर की भगतनवाला मंडी में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे, जहाँ किसान केवल प्रशासन की बेरुखी पर सवाल उठा रहे हैं।
इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया ने इसे पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की "पूरी तरह विफलता" करार दिया है। मजीठिया का आरोप है कि फसल पकने के बावजूद समय पर खरीद और लिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, जिससे किसान मजबूरन कम दामों पर फसल बेचने को मजबूर हुए। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसान पिछली बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे का भी इंतजार कर रहे हैं।
अमृतसर के किसान केवलजीत सिंह और अन्य प्रभावित किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण उनकी मेहनत पानी में मिल गई है। अब उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उनकी सुननेगा और नुकसान की भरपाई करेगा।