गुरुग्राम: हार्ट अटैक से पहले सीने में दर्द का इंतजार करना हो सकता है जानलेवा

अक्सर लोग यह मानते हैं कि जब तक सीने में तेज दर्द न हो, तब तक दिल की बीमारी का खतरा नहीं है, लेकिन यह सोच बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। गुरुग्राम के लीला होटल में आयोजित तीन दिवसीय 'इको एशिया/इको इंडिया-2026' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि हृदय में बदलाव लक्षणों के दिखने से महीनों या सालों पहले ही शुरू हो जाते हैं। कई बार बिना किसी लक्षण के भी दिल की गंभीर बीमारी पनपने लगती है, जिसे समय पर न पहचानना जानलेवा हो सकता है।
इस सम्मेलन की थीम 'शेपिंग द न्यू इरा ऑफ कार्डिएक इमेजिंग' रखी गई है। विशेषज्ञों ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि भारत में होने वाली कुल मौतों में 28.1 प्रतिशत हिस्सा हार्ट और रक्त वाहिकाओं की बीमारियों का है, जिसमें 80 प्रतिशत योगदान अकेले हार्ट अटैक और स्ट्रोक का है। वहीं, डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में दुनिया भर में इस्केमिक हार्ट डिजीज से करीब 95 लाख लोगों की जान गई, जो मौत का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है।
जिम और मैराथन के दौरान बढ़ रहा है खतरा
सम्मेलन में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि फिटनेस के प्रति बढ़ते जुनून के कारण लोग जिम जा रहे हैं और मैराथनों में हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इसी दौरान मौतों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। आईएई के एग्जीक्यूटिव ऑर्गनाइजिंग प्रेसिडेंट डॉ. राकेश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि हृदय रोग में लक्षणों का इंतजार करना सही तरीका नहीं है।
विशेषज्ञों ने 'स्टेज-बी हार्ट फेल्योर' पर विशेष चर्चा की, जिसमें मरीज को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन दिल की बनावट और उसके काम करने के तरीके में बदलाव शुरू हो चुके होते हैं। डॉ. हंसा गुप्ता के अनुसार, इकोकार्डियोग्राफी और स्ट्रेन इमेजिंग जैसी जांचों से इन शुरुआती बदलावों को समय रहते पहचाना जा सकता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए चेतावनी देते हुए इंटरनेशनल चेयरमैन डॉ. जे. ओह ने कहा कि कई शुगर के मरीजों को सीने में दर्द नहीं होता, जबकि उनकी दिल की मांसपेशियों में बदलाव शुरू हो चुके होते हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक, 2024 में भारत में 8.98 करोड़ वयस्क डायबिटीज से पीड़ित थे। ऐसे में डायबिटीज की देखभाल केवल ब्लॉकेज की जांच तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
सम्मेलन में यह भी बात सामने आई कि आधुनिक इमेजिंग और एआई (AI) की मदद से छिपी हुई हृदय बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, नेशनल चेयरमैन डॉ. एचके चोपड़ा ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती इस उन्नत तकनीक को बड़े विशेषज्ञ केंद्रों से निकालकर आम जनता तक पहुंचाना है। आईएसीसी चेयरमैन डॉ. कपिल खन्ना ने बताया कि इकोकार्डियोग्राफी अब सिर्फ बीमारी पहचानने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बिना रेडिएशन वाली एक ऐसी जांच है जो भविष्य के जोखिमों को समझने में मदद करती है।