हौज खास विलेज में MCD का बड़ा एक्शन: अवैध निर्माणों पर चला सीलिंग का हथौड़ा

दिल्ली का मशहूर हौज खास विलेज, जो कभी अपनी नाइटलाइफ़, आर्ट गैलरी और बुटीक स्टोर्स के लिए दुनिया भर में जाना जाता था, अब नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच फंसा हुआ है। हाल ही में दिल्ली नगर निगम (MCD) ने इस इलाके और पड़ोसी सैदुलजाब क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ एक बड़ा सीलिंग अभियान चलाया है।
यह कार्रवाई जून 2026 में शुरू हुई, जिसका मुख्य कारण आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन और बिना अनुमति के चल रहे कमर्शियल ऑपरेशंस थे। हौज खास विलेज की हालत इतनी चिंताजनक हो गई थी कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी को देखते हुए इस इलाके को एक 'टिकिंग टाइम बॉम्ब' यानी समय सीमा तय कर चुके बम की तरह बताया था।
सुरक्षा में चूक और हादसे ने बढ़ाई चिंता
इस इलाके में बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। संकरी गलियां, पार्किंग की समस्या और ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली ने यहां की स्थिति को और खराब कर दिया है। सुरक्षा की अनदेखी का सबसे दर्दनाक पहलू सितंबर 2026 में सामने आया, जब एक संदिग्ध एसी खराबी के कारण लगी आग में एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की जान चली गई। जांच में यह भी सामने आया कि यहां के कई बार और रेस्टोरेंट बिना फायर एनओसी (NOC) के ही संचालित हो रहे थे।
हालांकि, 26 जनवरी 2023 को एक नई पॉलिसी आई थी, जिसके तहत स्टैंडअलोन बार्स को रात 1 बजे तक चलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन ज़ोनिंग नियमों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की सख्ती ने यहां के व्यापारिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
इतिहास की बात करें तो अलाउद्दीन खिलजी और फिरोज शाह तुगलक द्वारा बनवाए गए 13वीं शताब्दी के जलकुंड के लिए मशहूर यह जगह 1980 के दशक में डिजाइनर बीना रमानी की पहल के बाद एक फैशन हब बनी थी। लेकिन अंधाधुंध कमर्शियलाइजेशन ने इसे खतरे की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। प्रॉपर्टी की बात करें तो फरवरी 2026 तक हौज खास को कैटेगरी बी कॉलोनी में रखा गया है, जिसके सर्कल रेट सितंबर 2014 के बाद से नहीं बदले हैं।