हरियाणा बिजली कर्मचारी हड़ताल: गुरुग्राम और नूंह में छाया अंधेरा, हजारों लोग परेशान

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम और नूंह में बिजली गुल, हजारों शिकायतें और फैक्ट्रियां बंद। जानें क्या है पूरा मामला।

Kittu Kumari22 October 20262 min read0 viewsNCR
हरियाणा बिजली कर्मचारी हड़ताल: गुरुग्राम और नूंह में छाया अंधेरा, हजारों लोग परेशान

हरियाणा में बिजली विभाग के करीब 40,000 कर्मचारियों ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 से तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। इस बड़े विरोध प्रदर्शन का सबसे बुरा असर गुरुग्राम, नूंह और फरीदाबाद में देखने को मिल रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बिजली गुल हो गई है। हरियाणा बिजली कर्मचारी हड़ताल की वजह से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।

यह हड़ताल 'हरियाणा बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा' द्वारा शुरू की गई है। विवाद की जड़ हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) का वह फैसला है, जिसमें गुरुग्राम और नूंह जिलों के लिए 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को 25 साल का पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है। कर्मचारियों का मानना है कि यह फैसला उनके हितों के खिलाफ है, इसलिए उन्होंने काम बंद करने का निर्णय लिया।

फैक्ट्रियां बंद और जनता में भारी आक्रोश

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बिजली कटौती का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र भी इसकी चपेट में हैं। गुरुग्राम की करीब 1,800 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। इसके अलावा, बिजली न होने से पानी की सप्लाई और इंटरनेट कनेक्टिविटी में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं, जिससे नाराज लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो हड़ताल के पहले 12 घंटों के भीतर ही बिजली विभाग को 3,000 से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं।

इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (EEFI) के मुताबिक, गुरुग्राम में करीब 96% कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे अस्पतालों जैसी आपातकालीन सेवाओं में बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन अन्य फीडर बंद रहेंगे।

इस संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कर्मचारियों से हड़ताल खत्म करने की अपील की है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि HERC के इस फैसले को अगले पांच से छह दिनों के भीतर अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती दी जाएगी। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी इस कानूनी रास्ते की पुष्टि की है। हालांकि, गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत अब तक बेनतीजा रही है।

फिलहाल, प्रशासन ने अस्पतालों, मेट्रो रेल और पीने के पानी की पंपिंग स्टेशनों जैसी आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर HERC का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो यह विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकाल तक जारी रह सकता है।

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