हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल: गुरुग्राम और फरीदाबाद में अंधेरा, सरकार अब कोर्ट जाएगी

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम और फरीदाबाद में बिजली-पानी की किल्लत। सरकार अब निजीकरण के फैसले को चुनौती देगी।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsNCR
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल: गुरुग्राम और फरीदाबाद में अंधेरा, सरकार अब कोर्ट जाएगी

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूह जैसे जिलों में बिजली और पानी की भारी किल्लत हो गई है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त मोर्चे द्वारा की जा रही इस कार्रवाई ने आम जनता और उद्योगों को मुश्किल में डाल दिया है।

इस पूरे विवाद की जड़ हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) का वह फैसला है, जिसमें 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को 25 साल का पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिया गया है। कर्मचारी यूनियनों का आरोप है कि यह कदम 'पिछले दरवाजे' से निजीकरण करने की साजिश है। उनका मानना है कि इससे न केवल उनकी नौकरी की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी, बल्कि किसानों और गरीब परिवारों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी भी खत्म हो सकती है।

गुरुग्राम में 98% स्टाफ नदारद, पानी की किल्लत से लोग सड़क पर

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हड़ताल का सबसे बुरा असर दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के पुराने गुरुग्राम सर्कल में देखने को मिला, जहां करीब 98% कर्मचारी काम पर नहीं आए। नतीजा यह हुआ कि बिजली मरम्मत और रखरखाव का काम पूरी तरह ठप हो गया। इस संकट ने करीब 1,800 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के काम पर ब्रेक लगा दिया है। साथ ही, बिजली न होने से पंपिंग स्टेशन बंद हो गए, जिससे लोगों के घरों में पानी की सप्लाई बंद हो गई और गुस्से में आए निवासियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन और जाम लगाना शुरू कर दिया।

संकट की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने मोर्चा संभाला है। मुख्यमंत्री सैनी ने घोषणा की है कि राज्य सरकार HERC के इस विवादास्पद फैसले को अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में चुनौती देगी।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया कि सरकार ने किसी भी निजी कंपनी से वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं मांगे थे और वे इस आदेश का विरोध करते हैं। उन्होंने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की और संकेत दिया कि सरकार बिजली अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत आयोग को लिखित नीति निर्देश जारी कर सकती है।

इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार ने यूनियन नेताओं को 23 अक्टूबर को पंचकुला में बैठक के लिए बुलाया है। हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रविंदर घंगास ने पुष्टि की है कि वे इस बैठक में शामिल होंगे, जिससे अब इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।

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