S+4 निर्माण: हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका का किया विरोध, कहा- तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया

हरियाणा सरकार ने स्टिल्ट प्लस फोर (S+4) मंजिला निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग करने वाली एक याचिका का कड़ा विरोध किया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTCP) ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर कर इस याचिका को भारी जुर्माने के साथ खारिज करने की अपील की है। सरकार का तर्क है कि याचिकाकर्ता ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है और डेटा में हेरफेर की है।
मामले की गहराई में जाएं तो DTCP के महानिदेशक डॉ. जे. गणेशन ने स्पष्ट किया कि गुरुग्राम-मानेसर क्षेत्र में कुल 15,447 S+4 बिल्डिंग प्लान्स में से 9,625 (लगभग 62.3%) प्लान्स को 2 जुलाई 2024 को पॉलिसी दोबारा लागू होने से पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी। याचिकाकर्ता सुनील सिंह ने दावा किया था कि पॉलिसी लागू होने के बाद लगभग 30,000 मंजूरियां दी गईं, जिसे सरकार ने पूरी तरह गलत बताया है। विभाग के अनुसार, याचिकाकर्ता ने पंचकुला जैसे अन्य क्षेत्रों के डेटा को भी इसमें जोड़ दिया, जिससे आंकड़े गलत नजर आए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी विवाद का फेर
S+4 पॉलिसी, जिसके तहत स्टिल्ट पार्किंग के ऊपर चार आवासीय मंजिलें बनाने की अनुमति है, लंबे समय से विवादों में रही है। बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर बढ़ते दबाव के कारण फरवरी 2023 में इस पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई और जुलाई 2024 में सरकार ने कुछ सख्त शर्तों के साथ इस पॉलिसी को फिर से शुरू किया। नई शर्तों के मुताबिक, केवल उन्हीं प्लॉटों पर निर्माण की अनुमति थी जो 10 मीटर या उससे चौड़ी सड़क पर स्थित थे और जिनके पास पड़ोसियों का एनओसी (NOC) था।
हालांकि, कानूनी लड़ाई तब तेज हुई जब 2 अप्रैल 2026 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए जुलाई 2024 के नोटिफिकेशन पर स्टे लगा दिया। कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार ने नई मंजूरियों और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी करने पर रोक लगा दी थी। इसी कड़ी में 21 जुलाई 2026 को DTCP ने राज्यभर में S+4 पोर्टल और HOBPAS जैसे ऑनलाइन सिस्टम बंद कर दिए थे।
सरकार का अब यह साफ स्टैंड है कि जबकि नई मंजूरियां रुकी हुई हैं, लेकिन जो निर्माण पहले से चल रहे हैं, उन पर पूरी तरह से रोक लगाना गलत होगा। विभाग ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा प्रोजेक्ट्स की निगरानी नगर निकायों द्वारा की जा रही है, इसलिए पूरी तरह से फ्रीज लगाने की मांग बेबुनियाद है।