गुरुग्राम और नूह में प्राइवेट बिजली वितरण पर रोक, हरियाणा सरकार ने पलटा फैसला
हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों के विरोध और हड़ताल के बाद गुरुग्राम और नूह में प्राइवेट बिजली लाइसेंस पर रोक लगाई।

हरियाणा सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए गुरुग्राम और नूह जिलों में प्राइवेट बिजली वितरण के लिए दिए गए लाइसेंस पर रोक लगा दी है। हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने अब 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को दिए गए 25 साल के पैरेलल डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंस को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम राज्य सरकार द्वारा बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत जारी निर्देशों के बाद उठाया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्य में कोई भी पैरेलल वितरण लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत 19 अक्टूबर 2026 को हुई थी, जब HERC ने सरकारी कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) के एकाधिकार को खत्म करने के लिए इस लाइसेंस को मंजूरी दी थी। आयोग का मानना था कि बिजली कनेक्शनों में भारी देरी और करीब 1 लाख पेंडिंग आवेदनों के कारण निजी कंपनियों को लाना जरूरी है। इलेवन ग्रुप के चेयरमैन सुनील सचदेवा ने इसे उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी जीत बताया था और अगले पांच वर्षों में 4,717 करोड़ रुपये के निवेश की योजना साझा की थी।
कर्मचारियों की हड़ताल और राजस्व का डर बना वजह
जैसे ही इस फैसले की खबर फैली, सरकारी बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। बिजली यूनियनों द्वारा 21 से 24 अक्टूबर के बीच की गई 72 घंटे की हड़ताल ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया, जिससे 50,000 से ज्यादा घरों और करीब 1,800 फैक्ट्रियों में बिजली गुल हो गई। इसके अलावा, सरकारी कंपनी DHBVNL ने चेतावनी दी थी कि अगर बड़े और ज्यादा भुगतान करने वाले ग्राहक प्राइवेट कंपनी की ओर शिफ्ट होते हैं, तो सरकार को 4.24 अरब से 42.72 अरब रुपये तक का भारी नुकसान हो सकता है, जिससे किसानों को मिलने वाली सब्सिडी पर बुरा असर पड़ेगा।
IIT कानपुर के विशेषज्ञ अनूप सिंह ने भी आगाह किया था कि पैरेलल लाइसेंसिंग से बुनियादी ढांचे की लागत बढ़ सकती है। विरोध बढ़ता देख मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हड़ताली कर्मचारियों को लिखित आश्वासन दिया कि कोई भी प्राइवेट पैरेलल लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी सरकार के इस रुख की पुष्टि की। अंततः, सरकार के हस्तक्षेप के बाद 28 अक्टूबर को HERC ने इस प्रोजेक्ट को रोकने का फैसला किया। अब इलेवन पावर के पास इस फैसले को अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (ATEL) में चुनौती देने का विकल्प बचा है।