हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी, रचा इतिहास

Kittu Kumari6 October 20262 min read0 viewsNational
हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी, रचा इतिहास

भारतीय महिला क्रिकेट में एक युग का अंत हो गया है। टीम की दिग्गज खिलाड़ी और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मंगलवार को तत्काल प्रभाव से कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। 37 वर्षीय हरमनप्रीत ने एक ऐसे नेतृत्व सफर को विराम दिया है, जिसने उन्हें न केवल एक आक्रामक बल्लेबाज के रूप में बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में से एक के रूप में स्थापित किया।

हरमनप्रीत के नेतृत्व का सफर 2016 में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों से शुरू हुआ था। साल 2022 में मिताली राज के संन्यास के बाद उन्हें वनडे और टेस्ट टीम की भी पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना हर कप्तान देखता है। पिछले साल नवंबर में उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को पहली बार घर की धरती पर ICC महिला क्रिकेट विश्व कप का खिताब जिताकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ ही वह कपिल देव और एमएस धोनी के बाद 50 ओवर के विश्व कप जीतने वाले केवल तीसरे भारतीय कप्तान बन गईं।

रिकॉर्ड्स और उपलब्धियों का सफर

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हरमनप्रीत कौर की कप्तानी का सबसे बड़ा प्रभाव टी20 फॉर्मेट में दिखा। वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (पुरुष और महिला दोनों मिलाकर) में 150 से अधिक टी20 मैच कप्तानी करने वाली दुनिया की पहली कप्तान बनीं; उन्होंने कुल 155 टी20 मैचों में टीम का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में भारत 2018 और 2023 के टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल तक पहुंचा और 2020 में वह टीम को फाइनल तक ले गईं, जहां भारत उपविजेता रहा।

उनकी कप्तानी की उपलब्धियां केवल विश्व कप तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने भारत को लगातार दो बार एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जिताने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने टीम को सिल्वर मेडल दिलाया, जहां फाइनल में उन्होंने शानदार 65 रनों की पारी खेली थी।

कुल मिलाकर, हरमनप्रीत ने 155 टी20, 51 वनडे और 5 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कमान संभाली। उनके नेतृत्व ने भारतीय महिला क्रिकेट को वैश्विक पहचान दिलाई और टीम में जीत की भूख जगाई। एक टी20 कप्तान के रूप में शुरुआत कर विश्व कप ट्रॉफी उठाने तक का उनका यह सफर दृढ़ संकल्प और ऐतिहासिक उपलब्धियों की मिसाल है।

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