नन्दू गैंग के करीबी साथी हाजी वसीम को दिल्ली कोर्ट से मिली जमानत

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
नन्दू गैंग के करीबी साथी हाजी वसीम को दिल्ली कोर्ट से मिली जमानत

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने फायरिंग के एक मामले में आरोपी वसीम उर्फ हाजी वसीम को जमानत दे दी है। हाजी वसीम को कुख्यात कपिल सगवान उर्फ नन्दू का करीबी सहयोगी माना जाता है। पुलिस ने उस पर आरोप लगाया था कि वह नन्दू गैंग के हमलावरों को अवैध हथियार मुहैया कराता था और फरार आरोपी नन्दू, जो कथित तौर पर ब्रिटेन में है, उसके साथ उसके नियमित संपर्क में रहता था।

हाजी वसीम को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 अगस्त को मयूर विहार इलाके में एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ के लीसाडी गेट का रहने वाला है। वह उत्तर पूर्व दिल्ली दंगों के एक मामले में भी आरोपी रहा है, जिसका संबंध शाहरुख पठान से बताया गया था।

कोर्ट ने इन आधारों पर दी राहत

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) बबिता पुनिया ने दिल्ली पुलिस के जवाब और दलीलों को सुनने के बाद वसीम को जमानत देने का फैसला किया। कोर्ट ने अपने अवलोकन में पाया कि कथित फायरिंग के दौरान किसी भी पुलिस अधिकारी को कोई चोट नहीं आई थी। साथ ही, पुलिस के जवाब में घटना स्थल से किसी खाली कारतूस के बरामद होने का जिक्र नहीं था। कोर्ट ने यह भी कहा कि हत्या के प्रयास (BNS की धारा 109(1)) के आरोप सही हैं या नहीं, यह ट्रायल के दौरान तय किया जाएगा।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील भानु मल्होत्रा ने तर्क दिया कि मुठभेड़ एक व्यस्त सड़क पर हुई, लेकिन पुलिस ने किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया। इसके अलावा, न तो सीसीटीवी फुटेज जुटाए गए और न ही तलाशी और जब्ती की कोई वीडियोग्राफी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने केवल हवा में फायरिंग करने का दावा किया था और एफएसएल (FSL) रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।

दूसरी ओर, सरकारी वकील (APP) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर है क्योंकि इसमें पुलिस टीम पर अवैध हथियार चलाने का आरोप है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी अन्य आपराधिक मामलों में शामिल है और जांच अभी जारी है।

कोर्ट ने हाजी वसीम को 25,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और दो समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जमानत कुछ शर्तों के साथ दी गई है, जिसमें यह शर्त शामिल है कि वह कोर्ट की अनुमति के बिना दिल्ली-एनसीआर नहीं छोड़ेगा, हर सुनवाई पर पेश होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेगा।

Share:

Comments

Leave a comment