गुरुग्राम में प्रदूषण का कहर: 50% वर्क फ्रॉम होम और निर्माण कार्यों पर लगी रोक
गुरुग्राम प्रशासन ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए 50% वर्क फ्रॉम होम और निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं।

गुरुग्राम में बढ़ते वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। शहर में हवा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए 5 जून से 20 नवंबर तक सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के दिशा-निर्देशों के पालन में लिया गया है, ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो और प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।
प्रशासन ने केवल ऑफिस ही नहीं, बल्कि धूल उड़ाने वाले निर्माण और विध्वंस कार्यों पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इस आदेश के दायरे में सड़कों, हाईवे, फ्लाईओवर और पाइपलाइन जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट भी आएंगे। हालांकि, राष्ट्रीय महत्व की आवश्यक परियोजनाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है, लेकिन उन्हें धूल नियंत्रण के कड़े नियमों का पालन करना होगा।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी कार्यालयों को कर्मचारियों की उपस्थिति का रोस्टर रिकॉर्ड रखना होगा। औद्योगिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं को, जहां घर से काम करना संभव नहीं है, इस नियम से बाहर रखा गया है। प्रवर्तन एजेंसियां रोजाना निरीक्षण करेंगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ CAQM अधिनियम, 2021 की धारा 14 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, सेहत के मोर्चे पर चेतावनी देते हुए मेदांता अस्पताल के डॉ. रंदीप गुलेरिया ने कहा कि जब AQI 'गंभीर' या 'बहुत गंभीर' श्रेणी में पहुंच जाता है, तो यह बुजुर्गों, बच्चों और दिल व फेफड़ों के मरीजों के लिए जानलेवा हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण अस्पतालों में सांस की तकलीफ और खांसी के इमरजेंसी केस बढ़ जाते हैं।
डॉ. गुलेरिया ने वायु प्रदूषण को एक "साइलेंट किलर" करार देते हुए लोगों को सलाह दी है कि:
- AQI खराब होने पर घर के अंदर रहें और खिड़की-दरवाजे बंद रखें।
- बाहर निकलने पर केवल N95 मास्क का ही उपयोग करें।
- बाहर एक्सरसाइज करने से बचें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
- दवाइयां और इनहेलर नियमित रूप से लें और सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
उन्होंने प्रदूषण के मुख्य कारणों में पराली जलाना, डीजल वाहनों की बढ़ती संख्या, पटाखों और निर्माण कार्यों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि सर्दियों में हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के करीब जमा हो जाते हैं, जिससे स्थिति और भी खराब हो जाती है।