गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद हुए गंभीर जलभराव ने बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है, जिससे जनता में भारी गुस्सा है। 24 अगस्त 2026 को शहर में भारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच लगभग 75 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसमें दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच सबसे तेज बारिश हुई। इस संकट के दौरान कम से कम 12 स्कूल बसें सुभाष चौक के पास आठ घंटे तक फंसी रहीं, जिससे माता-पिता को अपने बच्चों को बचाने के लिए बाढ़ के पानी में उतरना पड़ा। राजीव चौक, इफको चौक, उद्योग विहार और पुरानी दिल्ली रोड पर भी भारी जाम और जलभराव की सूचना मिली, जबकि सेक्टर 9 में सड़क धंसने से सीमेंट से भरा एक ट्रक उसमें समा गया।
आपात स्थिति से निपटने के लिए गुरुग्राम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 24 अगस्त को एडवाइजरी जारी की। इसके तहत कॉर्पोरेट दफ्तरों को वर्क फ्रॉम होम लागू करने और स्कूलों को 25 अगस्त को ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए। गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह ने 25 अगस्त को अंतर-विभागीय समन्वय समिति की बैठक बुलाई। प्रशासन ने जीएमडीए, एमसीजी, एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग को स्कूल बस रूटों पर जल निकासी को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। यातायात पुलिस को सुबह 5:30, 10:30 और दोपहर 12:30 बजे जलभराव की रियल-टाइम रिपोर्ट देने का काम सौंपा गया है। एमसीजी कमिश्नर प्रदीप दहिया ने स्वीकार किया कि मेडंता के पास 300-400 मीटर का क्रॉस-सेक्शन नाला अभी तक अधूरा है।
इस घटना के बाद राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने बार-बार होने वाली बाढ़ के लिए कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अरावली पहाड़ियों से यमुना की ओर पानी के प्राकृतिक बहाव को रोकने का आरोप लगाया और वर्तमान प्रयासों को केवल सतही समाधान बताते हुए स्थायी उपाय के रूप में भूमिगत सुरंगों का प्रस्ताव रखा। दूसरी ओर, कांग्रेस महासचिव और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के नेतृत्व में विपक्ष ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्ष ने व्यवस्थागत बुनियादी ढांचे की विफलता और जनता के पैसों के कुप्रबंधन का आरोप लगाया है।