गुरुग्राम विवि में मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'मनो-सुकून' क्लीनिक और शोध केंद्रों की शुरुआत

गुरुग्राम विश्वविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य के लिए मनो-सुकून क्लीनिक और दो नए शोध केंद्रों की शुरुआत हुई है। जानें कैसे लें लाभ।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम विवि में मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'मनो-सुकून' क्लीनिक और शोध केंद्रों की शुरुआत

आज के दौर में मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसी गंभीर विषय को देखते हुए गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने एक सराहनीय कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय कौशिक ने परिसर में गुरुग्राम विश्वविद्यालय सुकून क्लीनिक का औपचारिक उद्घाटन किया है। यह क्लीनिक न केवल छात्रों बल्कि आम जनता के मानसिक कल्याण के लिए भी मददगार साबित होगा।

इस मौके पर कुलपति ने केवल क्लीनिक ही नहीं, बल्कि दो महत्वपूर्ण शोध केंद्रों की भी शुरुआत की है। इनमें 'सेंटर फॉर प्रिवेंशन एंड इंटरवेंशन ऑफ सब्स्टेंस एब्यूज' (CIPSA) और 'सेंटर फॉर वुमेन्स हेल्थ एंड वेलबीइंग' (CWHW) शामिल हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों के सेवन को रोकना और महिलाओं के स्वास्थ्य व कल्याण पर शोध करना है।

अनुभवी विशेषज्ञों की टीम और मुफ्त सेवाओं की सुविधा

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कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने बताया कि इस क्लीनिक का लक्ष्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को सही परामर्श व नैदानिक सेवाएं देना है। यहाँ अनुभवी मनोचिकित्सकों और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की एक टीम तैनात रहेगी, जो भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने और मानसिक समस्याओं की समय रहते पहचान करने पर काम करेगी।

जो लोग परामर्श लेना चाहते हैं, वे विश्वविद्यालय की वेबसाइट के जरिए अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि समाज के कमजोर वर्गों का ख्याल रखते हुए बीपीएल कार्ड धारकों के लिए सेवाएं मुफ्त रखी गई हैं। इसके अलावा, मनोविज्ञान विभाग द्वारा गोद लिए गए दस गांवों और दो झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के निवासियों को भी यहाँ नि:शुल्क इलाज और परामर्श मिलेगा।

मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. गायत्री रैना ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा कि मानसिक समस्याओं और नशे की लत का समाधान सिर्फ दवाइयों से संभव नहीं है। इसके लिए समय पर पहचान, सही काउंसलिंग, परिवार का साथ और सामाजिक जागरूकता होना बेहद जरूरी है।

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