गुरुग्राम: रामलीला में राम-भरत मिलाप की लीला देख भावुक हुए दर्शक

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम: रामलीला में राम-भरत मिलाप की लीला देख भावुक हुए दर्शक

गुरुग्राम के जैकबपुरा में आयोजित श्री दुर्गा रामलीला में गुरुवार की रात एक ऐसा दृश्य मंचित हुआ, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। रामलीला के मंच पर जब राम और भरत के मिलन की लीला शुरू हुई, तो दर्शकों की उत्सुकता देखते ही बन रही थी। भाइयों के इस निस्वार्थ प्रेम और समर्पण ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया।

लीला की शुरुआत में दिखाया गया कि जब भरत अपने बड़े भाई राम को वापस अयोध्या लाने के लिए निकलते हैं, तो लक्ष्मण इस बात से काफी क्रोधित हो जाते हैं। लक्ष्मण का मानना था कि भरत सेना लेकर आ रहे हैं ताकि वे राम और उनके साथियों पर हमला कर सकें और अयोध्या का राज्य हड़प सकें। हालांकि, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लक्ष्मण को शांत कराते हुए कहा कि भरत का चरित्र बहुत ऊंचा है और वह अपने भाई के साथ ऐसा कभी नहीं सोच सकते।

भाइयों के प्रेम और पिता के वचनों की जीत

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जैसे ही राजकुमार भरत ने श्री राम को देखा, वे उनके चरणों में गिर पड़े और फूट-फूटकर रोने लगे। इस मिलन के दौरान जब भरत ने राजा दशरथ के निधन की खबर दी, तो राम, सीता और लक्ष्मण की आंखों से भी आंसू बहने लगे। भगवान राम ने नदी के तट पर विधि-विधान से अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

भरत ने श्री राम से अयोध्या चलने की बहुत विनती की, लेकिन राम ने पिता के वचनों को पूरा करने की बात कहकर इससे इनकार कर दिया। अंत में, भरत श्री राम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या की ओर रवाना हुए। इस दौरान बज रहे गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद शूर्पणखा की नाक काटे जाने की लीला का भी मंचन किया गया।

इस अवसर पर श्री दुर्गा रामलीला कमेटी ट्रस्ट के संरक्षण बनवारी लाल सैनी ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इससे शिक्षा लेनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यदि हम राम-भरत जैसा समर्पण और प्रेम अपने जीवन में उतारें, तो समाज में वास्तव में रामराज्य की स्थापना हो सकती है।

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