गुरुग्राम में डॉग स्टरलाइजेशन नियमों की अनदेखी, AWBI ने NGO के कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की मांग की

Kittu Kumari19 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम में डॉग स्टरलाइजेशन नियमों की अनदेखी, AWBI ने NGO के कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की मांग की

गुरुग्राम में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का काम देख रही एक संस्था अब कानूनी मुश्किलों में फंस गई है। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) ने नगर निगम गुरुग्राम (MCG) से मध्य प्रदेश की संस्था 'माँ बगलामुखी सेवा समिति' के कॉन्ट्रैक्ट तुरंत रद्द करने की मांग की है। AWBI का आरोप है कि इस NGO ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों, 2023 का खुला उल्लंघन किया है।

यह पूरा मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। AWBI ने 8 अक्टूबर 2026 को कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में बताया कि नियमों के मुताबिक, किसी भी स्ट्रीट डॉग स्टरलाइजेशन या वैक्सीनेशन प्रोग्राम को शुरू करने के लिए प्रोजेक्ट रिकग्निशन सर्टिफिकेट (PRC) होना अनिवार्य है। हालांकि, माँ बगलामुखी सेवा समिति ने 28 जनवरी 2026 को गुरुग्राम में काम शुरू कर दिया था, जबकि उनके पास यह जरूरी सर्टिफिकेट नहीं था।

जांच में मिलीं गंभीर खामियां और बुनियादी सुविधाओं का अभाव

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AWBI की जांच में इस NGO के केंद्रों पर बेहद चिंताजनक हालात मिले हैं। बोर्ड के मुताबिक, केंद्रों पर साफ-सफाई की भारी कमी थी और बुनियादी ढांचे का स्तर बहुत खराब था। जांच के दौरान वहां टिक-इन्फेक्टेड (किलनी से प्रभावित) कुत्ते पाए गए। इसके अलावा, वहां न तो सत्यापित पशु चिकित्सक थे और न ही कुत्तों को पकड़ने वाला कुशल स्टाफ। रिकॉर्ड्स के रखरखाव में भी भारी लापरवाही पाई गई, जिसके बाद AWBI ने इस संस्था के प्रोजेक्ट रिकग्निशन आवेदनों को खारिज कर दिया।

दूसरी ओर, नगर निगम गुरुग्राम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आशीष सिंहला ने स्वीकार किया कि शहर में स्टरलाइजेशन की भारी जरूरत और पेंडेंसी को देखते हुए एजेंसी को काम शुरू करने की अनुमति दी गई थी और उन्हें सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए छह महीने का समय दिया गया था।

वहीं, माँ बगलामुखी सेवा समिति के उपाध्यक्ष पंकज शुक्ला का कहना है कि उन्हें राज्य पशुपालन विभाग से सिफारिशें मिली थीं। उनका दावा है कि AWBI ने केवल "फोटो सही फॉर्मेट में न होने" जैसी तकनीकी वजहों से उनके आवेदन को खारिज किया है।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब काली वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक चेतना जोशी ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर इस NGO को दिए गए वर्क ऑर्डर को रद्द करने की मांग की। फिलहाल यह मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

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