गुरुग्राम नगर निगम: रोड स्वीपिंग मशीनों में गड़बड़ी, कार्यकारी अभियंता के खिलाफ चार्जशीट की सिफारिश

रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन में लापरवाही और अनियमितताओं के चलते गुरुग्राम नगर निगम के कार्यकारी अभियंता के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी।

Kittu Kumari3 November 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम नगर निगम: रोड स्वीपिंग मशीनों में गड़बड़ी, कार्यकारी अभियंता के खिलाफ चार्जशीट की सिफारिश

गुरुग्राम नगर निगम में मशीनों के रखरखाव और संचालन में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। रोड स्वीपिंग मशीनों की हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद निगम प्रशासन ने सख्त एक्शन लिया है। निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण के खिलाफ चार्जशीट जारी करने की सिफारिश की है। यह कार्रवाई हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के तहत मेजर पेनल्टी प्रक्रिया शुरू करने के लिए की गई है।

पूरा मामला नगर निगम की मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन और रखरखाव से जुड़े दो अनुबंधों का है। इन अनुबंधों के दौरान मशीनों को एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी को सौंपने (हैंडिंग-ओवर) की प्रक्रिया में भारी खामियां मिलीं। बताया जा रहा है कि 20 मशीनों के लिए 26 सितंबर और पांच अन्य मशीनों के लिए 12 अगस्त को कार्यादेश जारी किए गए थे। इस पूरी अवधि के दौरान कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण ही इस कार्य के प्रभारी थे।

जांच में खुली लापरवाही की पोल

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इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त निगमायुक्त यश जलुका को सौंपी गई थी। उन्होंने जांच के दौरान पाया कि मशीनों की हैंडिंग-टेकिंग के समय जरूरी तकनीकी सत्यापन नहीं किया गया था। साथ ही, मशीनों और उनके पुर्जों की वास्तविक स्थिति का कोई लिखित रिकॉर्ड या प्रमाणन उपलब्ध नहीं था, जो निगम की संपत्तियों की सुरक्षा और जवाबदेही के लिहाज से एक बड़ी चूक है।

जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि पुरानी एजेंसी 'जे.के. कॉन्ट्रैक्टर' से मशीनों की मरम्मत का खर्च वसूलने और उन पर जुर्माना लगाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। वहीं, नई एजेंसी 'राधा कृष्ण सोसाइटी लिमिटेड' की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। नियमों के मुताबिक एजेंसी को बोली लगाने से पहले मशीनों का निरीक्षण करना था और बड़ी मरम्मत का काम सात दिनों के भीतर पूरा करना था, लेकिन रिपोर्ट में एजेंसी की ओर से भी निरीक्षण और समय पर मरम्मत में कमियां पाई गई हैं।

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए निगमायुक्त ने 30 अक्टूबर को शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त और सचिव को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की है।

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