गुरुग्राम: SGST क्रेडिट के पेच में फंसे व्यापारियों के अरबों रुपये, अशोक बुवानीवाला ने जताई चिंता

गुरुग्राम के व्यापारियों और उद्यमियों के लिए जीएसटी (GST) की जटिलताएं अब एक बड़ा सिरदर्द बन गई हैं। टैक्स क्रेडिट सेट-ऑफ के उलझे हुए नियमों की वजह से देशभर के लाखों कारोबारियों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) सरकारी खातों में अटकी हुई है। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से इस व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की अपील की है।
अशोक बुवानीवाला के मुताबिक, वर्तमान जीएसटी प्रणाली में आईजीएसटी (IGST), सीजीएसटी (CGST) और एसजीएसटी (SGST) के सेट-ऑफ की जो प्रक्रिया है, वह कारोबारियों के लिए नकदी का संकट (Cash Crunch) पैदा कर रही है। व्यापारियों के खातों में जमा वैध टैक्स क्रेडिट का समय पर समायोजन या रिफंड नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी पूंजी महीनों तक फंसी रहती है।
नियमों की जटिलता से कारोबारियों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
इस समस्या को विस्तार से समझाते हुए बुवानीवाला ने बताया कि जब कोई कारोबारी दूसरे राज्य से माल खरीदता है, तो वह आईजीएसटी चुकाता है। लेकिन जब वही माल अपने राज्य में बेचा जाता है, तो ग्राहक से सीजीएसटी और एसजीएसटी वसूला जाता है। नियम यह है कि आईजीएसटी के क्रेडिट का सेट-ऑफ पहले सीजीएसटी में होता है और उसके बाद ही बची हुई राशि का समायोजन एसजीएसटी में किया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया के कारण एक बड़ी राशि लंबे समय तक एसजीएसटी क्रेडिट के रूप में अटकी रहती है। विडंबना यह है कि एक तरफ पूंजी सरकारी खाते में जमा है, वहीं दूसरी ओर कारोबारियों को अपनी दैनिक जरूरतों और कार्यशील पूंजी के लिए बैंकों से भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ रहा है।
बुवानीवाला ने जोर देकर कहा कि देशभर के व्यापारियों के अरबों रुपये इस तरह फंसे हुए हैं, जिसका सबसे बुरा असर छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) पर पड़ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब व्यापारी पूरी ईमानदारी से टैक्स भर रहे हैं, तो उनके वैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को रोकना न्यायसंगत नहीं है। जीएसटी का मकसद 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना था, न कि जटिलताओं के जरिए पूंजी को रोकना।