गुरुग्राम: गिरता भूजल स्तर चिंताजनक, कम पानी वाली फसलें अपनाएं किसान: राव इंद्रजीत सिंह

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम के किसानों से कम पानी वाली फसलें अपनाने की अपील की ताकि भूजल स्तर को बचाया जा सके।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम: गिरता भूजल स्तर चिंताजनक, कम पानी वाली फसलें अपनाएं किसान: राव इंद्रजीत सिंह

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम के किसानों को आगाह किया है कि क्षेत्र में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिसे बचाने के लिए अब खेती के तरीकों में बदलाव लाना जरूरी है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे ऐसी फसलों को प्राथमिकता दें जिनमें पानी की खपत कम होती हो, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

यह महत्वपूर्ण संदेश उन्होंने शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र, शिकोहपुर में आयोजित एक जिला स्तरीय कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी होने के अवसर पर रखा गया था। इस मौके पर गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया, जिसमें किसानों के कल्याण पर जोर दिया गया।

धान की जगह मक्का और बाजरा जैसे विकल्प चुनें

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राव इंद्रजीत सिंह ने जोर देकर कहा कि किसानों को धान जैसी फसलों पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी, क्योंकि इनमें पानी की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। इसकी जगह मक्का, बाजरा, दलहन और तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाना एक बेहतर विकल्प है। उन्होंने बताया कि फसल विविधीकरण (Crop Diversification) न केवल पानी बचाएगा, बल्कि इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहेगी और किसानों की कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।

मंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' जैसी पहल के जरिए सूक्ष्म सिंचाई और पानी के कुशल उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, देश को दालों और खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष मिशन चलाए जा रहे हैं, ताकि आयात कम हो और घरेलू किसानों को फायदा मिले। उन्होंने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के माध्यम से रसायन मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल खेती अपनाने की भी सलाह दी।

कार्यक्रम में पटौदी की विधायक बिमला चौधरी और मानेसर की मेयर डॉ. इंद्रजीत यादव सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। राव इंद्रजीत सिंह ने अंत में कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की जागरूक भागीदारी से ही एक टिकाऊ कृषि व्यवस्था का सपना पूरा हो सकता है।

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