गुरुग्राम: निजीकरण के विरोध में बिजलीकर्मियों की हड़ताल, औद्योगिक क्षेत्रों में ब्लैकआउट
बिजली निजीकरण के विरोध में गुरुग्राम के बिजली कर्मियों ने शुरू की हड़ताल, उद्योगों और रिहायशी इलाकों में बिजली गुल।

गुरुग्राम में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। इस विरोध के चलते शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल ने शहर में बिजली संकट को गहरा दिया है। बुधवार रात से ही कई इलाकों में बिजली गुल है, जिसका सबसे बुरा असर औद्योगिक क्षेत्रों और आम जनता पर पड़ रहा है।
हड़ताल का असर बुधवार रात 10 बजे से ही दिखना शुरू हो गया था। सेक्टर-37 जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे पूरे इलाके में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई। बिजली न होने के कारण फैक्ट्रियों की मशीनें बंद हो गईं और उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया। कादीपुर और बसई औद्योगिक क्षेत्रों में भी यही हाल रहा। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी ने बताया कि रात 10 बजे के बाद धीरे-धीरे पूरा औद्योगिक क्षेत्र अंधेरे में डूब गया, जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है। उद्यमियों को डर है कि अगर बिजली जल्द बहाल नहीं हुई, तो समय पर ऑर्डर पूरे नहीं हो पाएंगे, जिसका सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा।
रिहायशी इलाकों में हाहाकार, सीएम ने की अपील
बिजली संकट सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रिहायशी इलाकों में भी लोग परेशान हैं। सेक्टर-10ए और गढ़ी गांव सहित कई इलाकों में बुधवार रात 11 बजे से बिजली गुल है, जो गुरुवार दोपहर तक बहाल नहीं हो सकी। इस बीच, गुरुग्राम और नूंह की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली कर्मियों से हड़ताल वापस लेने का आग्रह किया है। सरकार ने यह प्रस्ताव भी दिया है कि कर्मचारियों की मांगों को अदालत में ले जाने के लिए सरकार एक योग्य अधिवक्ता उपलब्ध कराएगी, ताकि कानूनी तरीके से समाधान निकाला जा सके।