गुरुग्राम: बिजली निजीकरण के विरोध में हड़ताल से ब्लैकआउट, आम जनजीवन और उद्योग बेहाल

गुरुग्राम में बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल से ब्लैकआउट हुआ, जिससे पानी की किल्लत और उद्योगों में उत्पादन ठप हो गया।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम: बिजली निजीकरण के विरोध में हड़ताल से ब्लैकआउट, आम जनजीवन और उद्योग बेहाल

गुरुग्राम में बिजली वितरण के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है, जिसका सीधा असर आम जनता और कारोबारियों पर पड़ा है। बिजली कर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल की वजह से शहर के कई इलाकों में ब्लैकआउट हो गया, जिससे लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। इस संकट ने न केवल घरों की रोशनी छीनी, बल्कि पानी की सप्लाई और उद्योगों के पहिये को भी पूरी तरह जाम कर दिया है।

बुधवार रात 10 बजे से शुरू हुई यह हड़ताल गुरुवार और शुक्रवार को भी जारी रही। बिजली न होने के कारण जलापूर्ति ठप हो गई, जिससे सुबह बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर बुनियादी जरूरतों को पूरा करने तक में भारी मशक्कत करनी पड़ी। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि गुस्साए लोगों ने बसई चौक और दौलताबाद फ्लाईओवर पर जाम लगाकर अपना विरोध जताया। लोगों का सवाल यह है कि जब हड़ताल की सूचना पहले से थी, तो प्रशासन ने वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं किए?

करोड़ों का नुकसान और मजदूरों पर संकट

इस ब्लैकआउट का सबसे ज्यादा असर औद्योगिक क्षेत्रों में देखा गया। सेक्टर-37, बसई, कादीपुर, उद्योग विहार और बेगमपुर खटौला की हजारों फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया। पीएफटीआई के चेयरमैन दीपक मैनी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर बिजली उपलब्ध नहीं कराई जा सकती थी, तो उद्यमियों को पहले ही सूचित कर दिया जाना चाहिए था। मैनपावर के खाली बैठने और उत्पादन रुकने से उद्योगों को रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, जिससे मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी संकट मंडराने लगा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया है।

दूसरी ओर, हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कर्मचारियों ने महरौली रोड स्थित हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पैरलल लाइसेंस देने और निजीकरण के फैसले के खिलाफ कर्मचारियों ने जुलूस निकाला और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका स्पष्ट कहना है कि निजीकरण का यह फैसला न केवल कर्मचारियों के साथ, बल्कि आम जनता के साथ भी धोखा है और वे इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

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