गुरुग्राम: धूल प्रदूषण रोकने के लिए नगर निगम की सख्त तैयारी, अब जोनवार होगी निगरानी
गुरुग्राम नगर निगम ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सीएक्यूएम सिटी एक्शन प्लान के तहत जोनवार निगरानी और अधिकारियों की तैनाती के आदेश जारी किए हैं।

गुरुग्राम में बढ़ते धूल प्रदूषण पर लगाम लगाने और हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। शहर की सड़कों पर उड़ती धूल को नियंत्रित करने के लिए अब निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है। निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने इस संबंध में कड़े आदेश जारी करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि सीएक्यूएम (CAQM) सिटी एक्शन प्लान को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उन सड़कों का सत्यापन करना है, जिनका पुनर्विकास किया गया है। अधिकारी यह जांचेंगे कि सड़कों के निर्माण के बाद धूल को रोकने के लिए जो उपाय तय किए गए थे, वे वास्तव में लागू हुए हैं या नहीं। इसके लिए शहर को अलग-अलग जोन में बांटा गया है और अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है।
किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी?
नगर निगम द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक, निगरानी की कमान शीर्ष अधिकारियों के हाथों में है:
- जोन-1 और जोन-2: इन क्षेत्रों की सीधी निगरानी निगमायुक्त स्वयं करेंगे।
- जोन-3 और जोन-4: अतिरिक्त निगमायुक्त अंकिता चौधरी को इन जोन की जिम्मेदारी दी गई है।
- जोन-5 और जोन-6: अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका यहाँ के कार्यों की समीक्षा करेंगे।
- हॉर्टिकल्चर कार्य: अतिरिक्त निगमायुक्त रविन्द्र यादव को सभी जोन में बागवानी (हॉर्टिकल्चर) संबंधी कार्यों, तालाबों के पुनरुद्धार और वर्षा जल संचयन की गतिविधियों की निगरानी और सत्यापन का जिम्मा सौंपा गया है।
नगर निगम का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़कों के पुनर्विकास के बाद अक्सर धूल एक बड़ी समस्या बन जाती है। अब अधिकारी रिकॉर्ड के आधार पर कार्यों की प्रगति की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है। इस पूरी प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो सकेगा कि धूल नियंत्रण के लिए किए गए दावे कितने सही हैं और वास्तव में शहर की हवा में कितना सुधार आया है।