गुरुग्राम में बीमा लोकपाल बनकर 1.19 करोड़ रुपये की साइबर ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार

गुरुग्राम में बीमा लोकपाल का अधिकारी बनकर 1.19 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है। स्थानीय पुलिस की साइबर अपराध पश्चिम थाना की टीम ने अंतरराज्यीय गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गैंग फर्जी आधार और पैन कार्ड से बैंक खाता खुलवाकर ठगी करता था और इसका जाल मुंबई से दिल्ली तक फैला हुआ था।
- बीमा लोकपाल अधिकारी बनकर लैप्स पॉलिसियों के नाम पर 1.19 करोड़ की ठगी।
- मुंबई, हावड़ा और दिल्ली से जुड़े हैं गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों के तार।
- फर्जी आधार और पैन कार्ड से बैंक खाता खुलवाकर पैसे कराए गए ऑनलाइन ट्रांसफर।
- न्यायालय में पेश कर सभी आरोपियों का दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया।
ठगी का तरीका और आरोपियों की पहचान
पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार के अनुसार, आरोपी खुद को बीमा लोकपाल का अधिकारी बताकर लैप्स पॉलिसियों के नाम पर लोगों को झांसा देते थे और अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मंगवाते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भरत जनक सिंह कपाडिय़ा (68 वर्ष, निवासी मुंबई), मोहम्मद मोशिरुल हक (35 वर्ष, निवासी हावड़ा), सुभाष कुमार (40 वर्ष, निवासी ईस्ट दिल्ली) और साहिल गुसांई (19 वर्ष, निवासी ईस्ट दिल्ली) के रूप में हुई है।
शिकायत और पुलिस कार्रवाई
27 जुलाई 2026 को एक व्यक्ति ने थाना साइबर अपराध पश्चिम में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि अज्ञात लोगों ने फोन कर खुद को बीमा लोकपाल का अधिकारी बताया और लैप्स बीमा पॉलिसियों के बदले पैसे दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने फाइल चार्ज, मेंटेनेंस चार्ज, ट्रांजेक्शन चार्ज और फुल एंड फाइनल शुल्क के नाम पर शिकायतकर्ता से कुल एक करोड़ 19 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए और बाद में फोन बंद कर दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर तकनीकी साक्ष्य, बैंक खातों और कॉल डिटेल के आधार पर 5 अगस्त 2026 को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और रिमांड
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मोहम्मद मोशिरुल हक ने साथियों के साथ मिलकर उत्सव उपाध्याय के नाम से फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाए और बैंक खाता खुलवाया, जिसमें शिकायतकर्ता के 43 लाख रुपये जमा हुए। भरत जनक सिंह कपाडिय़ा इस खाते से चेक के जरिए राशि निकालकर अन्य साथियों तक पहुंचाता और कमीशन रखता था। सुभाष कुमार ईस्ट दिल्ली में साइबर कैफे चलाता है और उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए, जबकि साहिल गुसांई ने फर्जी दस्तावेज बनवाने, सिम कार्ड जारी कराने और कॉलिंग के लिए सिम उपलब्ध कराने में मदद की। पुलिस ने सभी चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है।