गुरुग्राम में बोरवेल बंद करने की तैयारी: हाई कोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने बनाया एक्शन प्लान

Kittu Kumari6 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम में बोरवेल बंद करने की तैयारी: हाई कोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन ने बनाया एक्शन प्लान

गुरुग्राम में गहराते जल संकट और तेजी से गिरते भूजल स्तर को देखते हुए अब प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद, शहर में बोरवेल को धीरे-धीरे खत्म करने (फेज आउट) के लिए एक औपचारिक कार्ययोजना तैयार की गई है। कोर्ट ने शहर की स्थिति को 'भयानक' बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

अदालत ने आंकड़ों के जरिए इस संकट की गंभीरता को स्पष्ट किया है। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर ने पाया कि गुरुग्राम में सालाना 43,263 हेक्टेयर मीटर भूजल निकाला जा रहा है, जो इसकी पुनर्भरण क्षमता (20,333 हेक्टेयर मीटर) से 212.77% अधिक है। शहर के कुछ इलाकों में जलस्तर 40 से 50 मीटर तक गिर गया है, जबकि सेक्टर 21 जैसे क्षेत्रों में पानी जमीन से 200 मीटर नीचे चला गया है।

औद्योगिक उपयोग के लिए ट्रीटेड पानी पर जोर

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इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) के सीईओ पी.सी. मीणा ने 5 अक्टूबर 2026 को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) और नगर निगम गुरुग्राम (MCG) के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। वर्तमान में शहर की पानी की मांग 770 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, जिसमें से 100 MLD की आपूर्ति ट्यूबवेलों से की जा रही है। अनुमान है कि 2031 तक यह मांग बढ़कर 1,170 MLD हो जाएगी।

प्रशासन ने अब यह रणनीति बनाई है कि उद्योगों में ताजे भूजल की जगह 'टर्शियरी ट्रीटेड वेस्टवाटर' (उपचारित गंदे पानी) का उपयोग किया जाए। फिलहाल GMDA टेक्सटाइल इंडस्ट्री को 10 MLD उपचारित पानी दे रहा है, जिसे अब और विस्तार दिया जाएगा। साथ ही, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) को हाउसिंग सोसायटियों के एसटीपी (STP) की निगरानी करने और जीरो-लिक्विड डिस्चार्ज पॉलिसी को सख्ती से लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है।

दूसरी ओर, पर्यावरण कार्यकर्ता सुनील सिंह ने भूजल निष्कर्षण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने, सभी बोरवेलों की जियो-टैगिंग और उन्हें सील करने की मांग की है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि जिन नई निर्माण परियोजनाओं के पास सतह जल (surface water) की सुनिश्चित व्यवस्था नहीं है, उन्हें फ्रीज कर दिया जाए। इसी बीच, नगर निगम गुरुग्राम पानी के पुनर्भरण के लिए IIT गांधीनगर के साथ मिलकर 'वाटर इंजेक्शन वेल सिस्टम' पर काम कर रहा है। प्रशासन 8 अक्टूबर 2026 तक इन सभी उपायों का विवरण देते हुए हाई कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल करेगा।

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