गुरुग्राम: घर का सपना बना मुसीबत, सालों से पजेशन का इंतज़ार कर रहे होमबायर्स

Kittu Kumari20 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम: घर का सपना बना मुसीबत, सालों से पजेशन का इंतज़ार कर रहे होमबायर्स

गुरुग्राम में अपना घर होने का सपना देखने वाले सैकड़ों परिवार आज एक ऐसी कानूनी और वित्तीय जंग लड़ रहे हैं, जिसने उनकी नींद उड़ा दी है। शहर के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में पजेशन में हो रही भारी देरी की वजह से लोग न केवल अपनी जमापूंजी खो रहे हैं, बल्कि वे भारी कर्ज के बोझ तले भी दबते जा रहे हैं। गुरुग्राम होमबायर्स का संघर्ष अब अदालतों की चौखट तक पहुंच गया है, जहां वे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

सेक्टर 89 के ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट की हालत तो और भी बदतर है। यहां करीब 1,300 घर खरीदार पिछले 11 सालों से अपने घर का इंतज़ार कर रहे हैं। साल 2012 में लॉन्च हुए इस प्रोजेक्ट का पजेशन 2014 तक मिलना था, लेकिन एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी लोग बेघर हैं। विनय भसीन, दीपिका मोहील, चित्रंजन गुप्ता और सुषमा जैसे कई खरीदारों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई इसमें लगा दी, लेकिन अब उन्हें अधूरे फ्लैट्स की ईएमआई (EMI) भी भरनी पड़ रही है और साथ ही किराए के मकानों में रहने का खर्च भी उठाना पड़ रहा है।

अदालती कार्यवाही और रिफंड की उम्मीद

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इस संकट के बीच कुछ कानूनी राहत की खबरें भी आई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने दावों के सत्यापन के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपर्स 'थ्री सी शेल्टर' और 'ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर' के खिलाफ दिवाला कार्यवाही (Insolvency proceedings) को बहाल कर दिया है।

दूसरी ओर, सेक्टर 102 के गुड़गांव ग्रीन्स प्रोजेक्ट में भी काफी हलचल है। हाल ही में एक फैसले में यह साफ किया गया कि रेरा (RERA) एक्ट 2016 की धारा 18(1) के तहत प्रमोटर की जिम्मेदारी अनिवार्य है। इसके अलावा, जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण ने एमार इंडिया लिमिटेड (Emaar India Ltd.) को निर्देश दिया है कि वह 232 घर खरीदारों को ब्याज सहित ₹67,32,464 रिफंड करे, क्योंकि कंपनी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ग्राहकों को नहीं दे पाई थी।

हालांकि, मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। एमार प्रॉपर्टीज और उसकी सहायक कंपनी के खिलाफ जमीन की कम कीमत दिखाने के आरोपों में एक एफआईआर (FIR) भी दर्ज की गई है। कंपनी का दावा है कि यह उनके पूर्व बिजनेस पार्टनर एमजीएफ (MGF) द्वारा किया गया उत्पीड़न है। इन सबके बीच, आम खरीदार आज भी इस उम्मीद में है कि उसे उसका घर मिले या उसकी मेहनत की कमाई वापस आए।

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