गुड़गांव ग्रीन्स के खरीदारों पर दोहरी मार, घर नहीं मिला पर EMI और कानूनी खर्चों ने तोड़ी कमर

अपना घर होने का सपना कई बार मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक अंतहीन दुःस्वप्न बन जाता है। ऐसा ही कुछ हो रहा है Gurgaon Greens homebuyers crisis के साथ, जहां ईमार एमजीएफ लैंड लिमिटेड (Emaar MGF Land Limited) के प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले लोग आज गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। इन खरीदारों को न तो उनके घर मिले हैं और न ही उनकी मानसिक शांति, लेकिन बैंक की किस्तें (EMI) और अदालती चक्करों का सिलसिला जारी है।
हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के आंकड़ों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट (पंजीकरण संख्या RERA-GRG-585-2020) दिसंबर 2019 तक पूरा होना था। लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में खरीदार आज भी अपने घर के कब्जे का इंतजार कर रहे हैं।
मध्यम वर्ग की मजबूरी और कानूनी लड़ाई
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा दर्द मध्यमवर्गीय निवेशकों का है। इन परिवारों के लिए यह निवेश उनकी जीवन भर की जमा पूंजी थी, जिसे वे अब वापस नहीं ले सकते। स्थिति यह है कि एक तरफ उन्हें उन संपत्तियों के लिए भारी ब्याज और EMI चुकानी पड़ रही है जिनका कब्जा उन्हें मिला ही नहीं, वहीं दूसरी तरफ बिल्डर को जवाबदेह ठहराने के लिए वे लाखों रुपये कानूनी लड़ाई में खर्च कर रहे हैं।
खरीदारों का कहना है कि वे एक ऐसे चक्रव्यूह में फंस गए हैं जहां घर पाने की उम्मीद में वे अपनी आर्थिक स्थिति को और खराब कर रहे हैं। कानूनी दांव-पेंच और प्रोजेक्ट में हो रही देरी ने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया है।