ग्रेटर नोएडा में यमुुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस हादसे को लेकर सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। ग्रेटर नोएडा में यमुुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद एक महिला पर भ्रामक और सांप्रदायिक दावे फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मीडिया सेल में तैनात सब-इंस्पेक्टर सुमित कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, महिला ने बस में आग लगने की घटना की तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे और दावा किया था कि बस को बीजेपी और आरएसएस के सदस्यों द्वारा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर आग के हवाले किया गया था। पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह से झूठा और भ्रामक बताया है।
पुलिस का कहना है कि ऐसे पोस्ट से लोगों के मन में प्रशासन के प्रति डर, गुस्सा और अविश्वास पैदा हो सकता था, जिससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद महिला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) से वह पोस्ट डिलीट कर दिया और माफी मांगते हुए कहा कि यह ट्वीट गलती से अपलोड हो गया था। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। यमुुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस भीषण बस हादसे में नौ लोगों की जान चली गई थी।
इससे पहले 24 सितंबर को ग्रेटर नोएडा स्लीपर बस आग मामले में दो ड्राइवरों और एक कंडक्टर सहित तीन आरोपियों को सूरजपुर स्थित जिला एवं सत्र अदालत में पेश किया गया था, जहां उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तार ड्राइवरों पर घटना से पहले बस के अंदर धूम्रपान करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, अदालत ले जाते समय ड्राइवरों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यह गलत है और वे बिल्कुल धूम्रपान नहीं करते हैं। यह पूरा मामला ग्रेटर नोएडा में एक स्लीपर बस में लगी आग से जुड़ा है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी और पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस मामले में पुलिस ने दो ड्राइवरों और एक कंडक्टर को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच अभी जारी है।