गूगल मैप्स की बड़ी गलती: दिल्ली में 1 किमी की दूरी के लिए यात्रियों को घुमाया 13 किमी

देश की राजधानी दिल्ली में डिजिटल नेवलिगेशन पर भरोसा करने वालों को एक बड़ा झटका लगा है। शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को लुटियंस दिल्ली में गूगल मैप्स नेवलिगेशन गड़बड़ी के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हैरान करने वाली बात यह रही कि गोले पोस्ट ऑफिस से जंतर मंतर तक का सफर, जो महज एक किलोमीटर का है, ऐप ने उसे 13 किलोमीटर लंबे घुमावदार रास्ते के रूप में दिखा दिया, जिससे लोग पूरी तरह भ्रमित हो गए।
यह कोई पहली बार नहीं है जब गूगल मैप्स की गलतियों ने दिल्ली वालों को परेशान किया हो। हाल ही में शुरू हुए बारापुला फेज-III एलिवेटेड रोड पर भी ऐसी ही समस्या देखी गई। यहाँ ऐप भारी ट्रैफिक होने के बावजूद रास्ते को 'क्लियर' दिखा रहा था। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, ऐप वास्तविक ट्रैफिक की स्थिति दिखाने में नाकाम रहा, जिसके कारण उस सड़क पर वाहनों का भारी दबाव बढ़ गया और भीषण जाम लग गया। पुलिस ने इस तकनीकी खराबी की औपचारिक शिकायत गूगल से की है और जल्द समाधान की मांग की है।
PWD मंत्री ने बताया अपडेट में लगने वाला समय
दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री परवेश वर्मा ने इस मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि उनका विभाग गूगल के साथ लगातार संपर्क में है। मंत्री वर्मा ने स्पष्ट किया कि जब कोई नया बुनियादी ढांचा या सड़क बनती है, तो गूगल मैप्स के एल्गोरिदम को ट्रैफिक डेटा को कैलिब्रेट करने और अपडेट करने में आमतौर पर लगभग 15 दिन का समय लगता है।
प्रशासन ने अब वाहन चालकों को सलाह दी है कि वे पूरी तरह ऐप पर निर्भर रहने के बजाय सड़क पर लगे संकेतों (Signage) और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
डिजिटल नेवलिगेशन की ये खामियां अब सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही हैं। जून 2026 में आईटीओ विकास मार्ग पर गलत रूट दिखाने की वजह से कई मोटर चालकों को ट्रैफिक जाम और जुर्माने का सामना करना पड़ा था। वहीं, उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में एक परिवार के साथ गंभीर हादसा हुआ, जहाँ गूगल मैप्स के निर्देशों का पालन करते हुए उनकी गाड़ी चार फीट गहरे नाले में गिर गई। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तकनीक पर अंधविश्वास करना जोखिम भरा हो सकता है।