दिल्ली में ग्लोबल स्किल्स मोबिलिटी एसोसिएशन लॉन्च, वर्कफोर्स स्टैंडर्ड्स पर जोर

भारतीय कार्यबल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर और सुरक्षा दिलाने के लिए नई दिल्ली के आईटीसी मौर्या में 12 अक्टूबर, 2026 को ग्लोबल स्किल्स मोबिलिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (GSMAI) की औपचारिक शुरुआत की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा भरोसेमंद इकोसिस्टम तैयार करना है, जिससे भारत के स्किल्ड वर्कफोर्स की वैश्विक स्तर पर आवाजाही आसान और पारदर्शी हो सके। इस लॉन्च इवेंट में 17 संस्थापक संगठनों के साथ-साथ सरकारी प्रतिनिधियों, राजनयिक मिशनों, राज्य सरकारों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।
भर्ती में धोखाधड़ी और शोषण पर विदेश सचिव की चेतावनी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने टैलेंट मोबिलिटी सेक्टर में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही की सख्त जरूरत बताई। उन्होंने आगाह किया कि इस पूरे तंत्र की विश्वसनीयता कुछ गिने-चुने लोगों की गलत हरकतों की वजह से खतरे में पड़ सकती है। मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाले शोषण, धोखाधड़ी और स्किल मिसमैच (कौशल बेमेल) जैसे गंभीर जोखिमों की ओर सबका ध्यान खींचा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसोसिएशन को ऐसे उच्च मानक तय करने चाहिए जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले भारतीयों के हितों की रक्षा हो सके और देश को 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) जैसी समस्याओं से बचाया जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इन प्रयासों में पूरी तरह भागीदार रहेगी।
विदेश सचिव ने अमेरिका के परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कई कंपनियों को संघीय जांच के बाद निलंबित किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि टैलेंट मोबिलिटी सीधे तौर पर लोगों की आकांक्षाओं और उनकी रोजी-रोटी से जुड़ी होती है, इसलिए इनके हितों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि यदि टैलेंट मोबिलिटी को सही ढंग से मैनेज किया जाए, तो यह भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदेमंद है। इससे न केवल इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।