Ghalib in New Delhi: दिल्ली की भागदौड़ में गालिब का अंदाज, दर्शकों को लुभा रहा है यह कॉमेडी नाटक
1997 से चले आ रहे नाटक 'Ghalib in New Delhi' में देखिए कैसे मिर्जा गालिब आज की दिल्ली की उलझनों को सुलझाते हैं।

कल्पना कीजिए कि 19वीं सदी का मशहूर शायर मिर्जा गालिब अचानक आज की दिल्ली की सड़कों पर आ जाए, तो क्या होगा? इसी दिलचस्प विचार पर आधारित नाटक 'Ghalib in New Delhi' पिछले कई सालों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। यह नाटक केवल एक कहानी नहीं, बल्कि पुराने दौर की तहजीब और आज की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच का एक मजेदार मुकाबला है।
डॉ. एम. सईद आलम द्वारा लिखित और निर्देशित यह नाटक 1997 से मंच पर है और अब तक इसके 600 से ज्यादा शो हो चुके हैं। पियरो ट्रूप (Pierrot's Troupe) द्वारा निर्मित इस प्रोडक्शन में खुद डॉ. सईद आलम ही गालिब की भूमिका निभाते हैं। नाटक की कहानी में गालिब का पुनर्जन्म आधुनिक दिल्ली में होता है, जहाँ वह ऑटो रिक्शा चालकों, कॉलेज के छात्रों और कॉर्पोरेट ऑफिसों में काम करने वाले लोगों से मिलते हैं। गालिब के लिए यह नई दुनिया किसी अजूबे से कम नहीं है, और उनकी इसी हैरानी में छिपा है इस नाटक का असली मजा।
आधुनिक समस्याओं पर गालिब का तीखा कटाक्ष
नाटक में गालिब सिर्फ घूमते नहीं हैं, बल्कि वे आज के दौर की महंगाई, गिरती हवा की गुणवत्ता (प्रदूषण) और बदलते सामाजिक तौर-तरीकों पर अपनी खास शैली में तंज कसते हैं। वे पुरानी दिल्ली की परंपराओं की तुलना आज की आधुनिकता से करते हैं, जो दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर देता है।
इस नाटक की सबसे बड़ी खूबी इसकी 'डायनामिक स्क्रिप्ट' है। डॉ. सईद आलम समय-समय पर संवादों में बदलाव करते रहते हैं और समसामयिक राजनीतिक व सामाजिक घटनाओं को इसमें जोड़ देते हैं, जिससे यह नाटक हमेशा ताजा और प्रासंगिक बना रहता है। हाल ही में 30 अक्टूबर 2026 को श्री राम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में इसका एक शानदार शो आयोजित किया गया था। अंजू छाबड़ा और हिमांशु श्रीवास्तव जैसे कलाकारों के साथ यह नाटक आज भी अपनी लोकप्रियता बरकरार रखे हुए है और ऐतिहासिक चरित्र चित्रण व आधुनिक व्यंग्य का एक बेहतरीन संगम पेश करता है।