दिल्ली-NCR के थ्रिफ्ट मार्केट्स में Gen Z का क्रेज, 500 रुपये के अंदर मिल रहा है ट्रेंडी फैशन
दिल्ली-NCR के युवा अब महंगे ब्रांड्स छोड़ 500 रुपये से कम में ट्रेंडी और विंटेज फैशन अपना रहे हैं। जानें क्या है यह नया ट्रेंड।

आजकल के युवाओं यानी Gen Z के लिए फैशन का मतलब अब सिर्फ महंगे डिजाइनर लेबल या बड़े ब्रांड्स नहीं रह गया है। दिल्ली-NCR के युवा अब बजट-फ्रेंडली और सस्टेनेबल फैशन की ओर रुख कर रहे हैं। शहर के मशहूर स्ट्रीट मार्केट्स जैसे सरोजिनी नगर, लाजपत नगर और जनपथ अब इन युवाओं के पसंदीदा ठिकाने बन गए हैं, जहां वे महज 500 रुपये से कम में सेलिब्रिटी स्टाइल स्ट्रीटवियर और विंटेज लुक्स तैयार कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि थ्रिफ्टिंग (पुराने या सेकंड हैंड कपड़े खरीदना) अब सिर्फ मजबूरी नहीं, बल्कि एक स्टेटस सिंबल बन चुका है। युवा अपनी अलग पहचान बनाने और विंटेज एस्थेटिक्स के लिए इन बाजारों का रुख कर रहे हैं। इंटरनेट पर भी इस बदलाव का बड़ा असर दिख रहा है। अक्टूबर 2026 के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, "हाउ टू थ्रिफ्ट" (how to thrift) सर्च करने वालों में 850% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जबकि "मेरे पास थ्रिफ्ट स्टोर" (thrift store near me) की तलाश करने वालों में 600% का इजाफा हुआ है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 'सर्कुलर फैशन' में दिलचस्पी पिछले एक साल में 2,500% तक बढ़ी है।
Y2K स्टाइल और डिजिटल मार्केट का जादू
युवा खरीदार खास तौर पर Y2K इंस्पायर्ड कपड़ों की तलाश में रहते हैं। इनमें बैगी जींस, जॉर्ट्स (jorts), ट्रैक पैंट्स, ओवरसाइज्ड शर्ट्स और विंटेज जैकेट काफी डिमांड में हैं। इस ट्रेंड को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने और भी बढ़ावा दिया है। इंस्टाग्राम पर चलने वाले थ्रिफ्ट स्टोर्स और कम्युनिटी मार्केटप्लेस अब 'ड्रॉप कल्चर' के जरिए क्यूरेटेड कलेक्शन रिलीज कर रहे हैं, जिससे युवाओं में इन्हें पाने की होड़ मची रहती है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि Gen Z अब फास्ट-फैशन की एकरूपता और जल्दी खराब होने वाले कपड़ों को नकार रहा है। वे ऐसे कपड़ों को पसंद कर रहे हैं जिनका अपना एक इतिहास हो और जो यूनिक हों। इसी रुझान को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि घरेलू सेकंड-हैंड कपड़ों का बाजार 2032 तक तीन गुना बढ़ जाएगा, जिससे यह एक छोटे से शौक से निकलकर मुख्यधारा की खपत का जरिया बन जाएगा।