सदर बाजार रामलीला पहुंचे जनरल अनिल चौहान, रामायण से साझा किए 'धर्मयुद्ध' के सबक

दिल्ली के सदर बाजार रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला उत्सव में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना की, बल्कि रामायण के जरिए युद्ध में नैतिकता और मर्यादा के महत्व पर भी गहरी चर्चा की। जनरल चौहान ने कहा कि रामायण हमें सिखाती है कि जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण वह तरीका है जिससे युद्ध लड़ा जाता है।
मीडिया से बात करते हुए जनरल अनिल चौहान ने सदर बाजार की रामलीला की सराहना करते हुए बताया कि यह परंपरा पिछले 72 वर्षों से लगातार चली आ रही है, जो हमारी संस्कृति और विरासत को जीवित रखने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
युद्ध में मर्यादा और नैतिकता का महत्व
रामायण के प्रसंगों का जिक्र करते हुए जनरल चौहान ने भगवान राम और रावण के बीच हुए अंतिम युद्ध से एक बड़ी सीख साझा की। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में युद्ध केवल जीतने के लिए नहीं, बल्कि धर्म और नैतिकता के साथ लड़े जाते थे।
उन्होंने एक विशेष घटना का उल्लेख करते हुए कहा,
"भगवान राम और रावण के बीच युद्ध करीब सात दिनों तक चला। यह एक धर्मयुद्ध था। मुझे बताया गया कि एक दिन रावण पूरी तरह थक चुका था और उसका रथ भी खराब हो गया था। उस स्थिति में भगवान राम ने कमजोर पड़ चुके रावण पर हमला नहीं किया, बल्कि उसे घर जाकर आराम करने और अगली सुबह अपनी पूरी शक्ति के साथ वापस आने को कहा।"
जनरल चौहान ने जोर देकर कहा कि प्राचीन काल में यह नियम था कि जब कोई योद्धा अपने हथियार डाल देता था, तो उसे मारा नहीं जाता था। उन्होंने इसे 'राइटियस बैटल' या धर्मयुद्ध की संज्ञा देते हुए कहा कि युद्ध के दौरान भी सम्मान, संयम और नैतिक सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य होता है। उनके ये विचार इस बात को रेखांकित करते हैं कि विजय का उद्देश्य केवल लक्ष्य प्राप्त करना नहीं, बल्कि मर्यादा का पालन करना भी होना चाहिए।