केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में 20 कलाकारों को किया सम्मानित

नई दिल्ली में ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारतीय दृश्य कला के क्षेत्र में उनके रचनात्मक योगदान के लिए 20 पुरस्कार विजेता कलाकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान शेखावत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ललित कला अकादमी के विभिन्न केंद्रों पर 'सेवा ही संस्कृति' कार्यशालाओं के दौरान बेकार सामग्री से बनाई गई कलाकृतियों को देखा।
सृजनात्मकता और स्थिरता का महत्व
सभा को संबोधित करते हुए शेखावत ने सृजनात्मकता और स्थिरता को एक साथ लाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित 'सेवा ही संस्कृति' पहल यह प्रदर्शित करती है कि कैसे रचनात्मकता और सेवा की भावना सार्थक रूप से एक साथ आ सकती है। उन्होंने 'वेस्ट टू Wonder' पहल सहित ललित कला अकादमी के प्रयासों की सराहना की, जो छोड़ी गई सामग्रियों को एक नई कलात्मक अभिव्यक्ति देती है और स्थिरता को बढ़ावा देने में कला की भूमिका को उजागर करती है।
प्रदर्शनी की विशेषता और प्रविष्टियां
विवेक अग्रवाल ने कलाकारों और समकालीन भारतीय कला को व्यापक अवसर और अधिक दृश्यता प्रदान करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने आम जनता, कला प्रेमियों और आगंतुकों को रविंद्र भवन, नई दिल्ली में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी देखने के लिए आमंत्रित किया, जिसे 31 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दिया गया है। राजीव कुमार ने राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी की राष्ट्रीय पहुंच और विकास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 65वें संस्करण को 6,000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें से दो-स्तरीय जूरी प्रक्रिया के माध्यम से 270 कलाकारों का चयन किया गया। इस अवसर पर राम गोपाल खोंडकर द्वारा संपादित अब्दुल अजीज रैबा पर एक मोनोग्राफ भी जारी किया गया। कार्यक्रम के बाद मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ललित कला गैलरी में राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का दौरा किया।