नई दिल्ली: फ्रांस दोबारा बना ISA का सह-अध्यक्ष, 2027-2029 के कार्यकाल के लिए मिली जीत
नई दिल्ली में आयोजित ISA की नौवीं असेंबली में फ्रांस को 2027-2029 के लिए सह-अध्यक्ष चुना गया है। जानें भारत-फ्रांस की इस साझेदारी की खास बातें।

नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) की नौवीं असेंबली में एक बड़ा फैसला लिया गया है। फ्रांस ने एक बार फिर ISA के सह-अध्यक्ष पद पर अपनी जीत दर्ज की है और उसे 2027 से 2029 तक के दो साल के कार्यकाल के लिए चुना गया है। इस चुनाव में फ्रांस का मुकाबला बुर्किना फासो से था, जिसमें फ्रांस ने बाजी मारी। 2 से 5 नवंबर तक दिल्ली में चल रही इस बैठक के दौरान यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
भारत और फ्रांस ने मिलकर 2015 में ISA की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। फ्रांस के दूतावास ने जारी एक बयान में कहा कि सह-अध्यक्ष के तौर पर फ्रांस सौर ऊर्जा और स्वच्छ विद्युतीकरण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। यह कदम तुर्की के अंताल्या में होने वाले COP31 से पहले काफी अहम माना जा रहा है।
भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी और भविष्य के लक्ष्य
भारत और फ्रांस के बीच ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन को लेकर गहरा तालमेल है। साल 2018 में अक्षय ऊर्जा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया गया था, जिसे 2025 में फिर से नवीनीकृत किया गया। दोनों देश मिलकर ग्रीन फाइनेंस, शहरी मोबिलिटी, अक्षय ऊर्जा और जैव विविधता संरक्षण जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जिन्हें फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी (AFD) द्वारा मैनेज किया जा रहा है।
इस साझेदारी को और मजबूती तब मिली जब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की फरवरी 2026 की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर पर ले जाया गया। इसके तहत दोनों देश जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
फ्रांस के पारिस्थितिक संक्रमण मंत्री मैथ्यू लेफेवरे ने इस असेंबली के दौरान ISA के लिए 2026 के लिए 50,000 यूरो के स्वैच्छिक योगदान की घोषणा की। उन्होंने फ्रांस की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे विकासशील देशों में क्षमता निर्माण (STAR-C प्रोग्राम), फाइनेंस तक आसान पहुंच (अफ्रीका सोलर फैसिलिटी) और ऊर्जा ट्रांजिशन की वैल्यू चेन में विविधता लाने पर जोर देंगे। गौरतलब है कि फ्रांस ने 2021 से STAR-C प्रोग्राम में 1.25 मिलियन यूरो का योगदान दिया है।