यौन शोषण मामला: धमकी और दबाव को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने पूर्व शिक्षक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली की एक अदालत ने यौन शोषण के मामले में फंसे एक पूर्व शिक्षक को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले में जिस तरह की धमकियां, डर और भावनात्मक दबाव के आरोप लगे हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में यह कहना मुश्किल है कि महिला ने पूरी तरह अपनी इच्छा से संबंध बनाए थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी का महिला का शिक्षक होना एक महत्वपूर्ण पहलू है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी पद या अधिकार पर होता है, तो वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर दूसरे को प्रभावित कर सकता है। हालांकि दोनों पक्ष वयस्क थे, लेकिन शिकायत के अनुसार जब महिला ने कॉलेज जॉइन किया और पहली बार यौन संबंध बने, तब वह 18 साल से कम उम्र की थी। इस तथ्य ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
वीडियो वायरल करने की धमकी और मानसिक प्रताड़ना
पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि आरोपी ने उसकी सहमति के बिना आपत्तिजनक वीडियो बनाए और बाद में उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी। महिला का कहना है कि इस दबाव और डर की वजह से वह लंबे समय तक मानसिक तनाव से गुजरी। अदालत ने व्हाट्सएप चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का जिक्र करते हुए कहा कि ये केवल एक निजी रिश्ते को नहीं दर्शाते, बल्कि इनमें धमकी और दबाव के संकेत भी मिलते हैं।
शिकायत में यह भी बताया गया कि जब महिला ने आरोपी से दूरी बनाने की कोशिश की, तो दबाव और धमकियां और बढ़ गईं। इतना ही नहीं, आरोपी द्वारा महिला के दोस्तों और परिवार पर भी दबाव डालने के आरोप लगे हैं। कोर्ट ने माना कि यदि इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी जाती है, तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।
दूसरी ओर, आरोपी ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई है और यह रिश्ता आपसी सहमति का था। उसने यह भी दावा किया कि यह मामला जुलाई 2026 की एक घटना के बाद दर्ज कराई गई दूसरी एफआईआर के जवाब में एक 'काउंटरब्लास्ट' है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर में देरी या अन्य केस होना जमानत का आधार नहीं बन सकते और इन सभी तथ्यों की जांच ट्रायल के दौरान ही होगी।