दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन यानी एसआईआर (SIR) अभियान को लेकर पूर्व राजनयिकों ने कड़ा विरोध जताया है। पूर्व राजनयिक जी. पार्थसारथी ने इस प्रक्रिया की सार्वजनिक रूप से निंदा की है और वर्तमान सत्यापन प्रणाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की है। मयूर विहार के आईएफएस अपार्टमेंट्स में रहने वाले जी. पार्थसारथी का नाम पुरानी मतदाता सूची से मैच नहीं हुआ, जिसके बाद यह विवाद सामने आया। उनके साथ वहां रहने वाले 50 से 60 अन्य सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ा। उनकी बेटी रुक्मिणी ने निवासियों के बीच इस व्यापक नाराजगी के बारे में बताया, जबकि पूर्व राजदूत कैलाश अग्रवाल ने पूरी प्रक्रिया को अत्यधिक जटिल और भ्रमित करने वाला बताया है।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किए गए इस एसआईआर अभियान के तहत राजधानी की मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है, जिसमें 2002 की मतदाता सूची को मुख्य आधार बनाया गया है। इस प्रक्रिया के कारण मसौदा मतदाता सूची से 47 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं, और लगभग 33 लाख मतदाताओं को विसंगतियों से जुड़े नोटिस मिले हैं या उन्हें अनमैप की श्रेणी में रखा गया है।
इस ऑडिट के दौरान जगदीप धनखड़, एस. जयशंकर, लाल कृष्ण आडवाणी और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू जैसी जानी-मानी हस्तियों को भी नोटिस मिले हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम का स्वतः हटना नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के लिए फॉर्म 6, 7 या 8 जमा करके डेटा में सुधार करने का अवसर है। नोटिस पाने वाले वीआईपी लोगों के लिए फील्ड वेरिफिकेशन का काम पूरा हो चुका है।
निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 30 सितंबर 2026 की अंतिम तारीख तय की है, जबकि दिल्ली के लिए अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 4 नवंबर 2026 को किया जाना तय हुआ है।