दिल्ली में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर पूर्व राजनयिकों ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस खबर के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: पूर्व राजदूत जी. पार्थसारथी ने सत्यापन प्रक्रिया की तीखी आलोचना की और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने की मांग की। उनके साथ ही मयूर विहार के आईएफएस अपार्टमेंट में रहने वाले 50 से 60 पूर्व सरकारी अधिकारियों को भी ऐसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व राजदूत कैलाश अग्रवाल ने इस पूरी प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल और भ्रमित करने वाला बताया है।
चुनाव आयोग के अनुसार 30 जून 2026 को शुरू हुई इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया गया जो 29 जुलाई 2026 को पूरा हुआ। मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद 47 लाख से अधिक नाम हटाए गए और एस. जयशंकर, जगदीप धनखड़ तथा लाल कृष्ण आडवाणी जैसे बड़े नामों सहित लगभग 33 लाख मतदाताओं को विसंगतियों के कारण नोटिस मिले या उन्हें अनमैप श्रेणी में रखा गया।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम काटना नहीं है बल्कि फॉर्म 6, 7 या 8 के जरिए विवरण सुधारने का मौका मिलना है। इस पुनरीक्षण के लिए वर्ष 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया है। नागरिकों द्वारा दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है और दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।