मरीजों का इलाज बिना भेदभाव के करें और खुद के मानसिक स्वास्थ्य का रखें ख्याल: पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड

UCMS के 55वें स्थापना दिवस पर पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड ने डॉक्टरों से मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर दिया।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
मरीजों का इलाज बिना भेदभाव के करें और खुद के मानसिक स्वास्थ्य का रखें ख्याल: पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड

दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) के 55वें स्थापना दिवस के मौके पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड ने डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने चिकित्सा पेशे में करुणा, मानवता और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विशेष जोर दिया। पूर्व सीजेआई ने कहा कि डॉक्टरों का सबसे महत्वपूर्ण काम वह होता है जिसे अक्सर दुनिया देख नहीं पाती, लेकिन वही काम वास्तव में जीवन बदलता है।

अपने संबोधन में उन्होंने गांधीजी का एक प्रेरक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि 1924 में यरवडा जेल में कैद महात्मा गांधी की अपेंडिसाइटिस की सर्जरी एक ब्रिटिश अधिकारी ने की थी। उस समय ऑपरेशन थिएटर में न तो सर्जन की राष्ट्रीयता मायने रखती थी और न ही मरीज की राजनीतिक स्थिति। गांधीजी ने उस डॉक्टर का आभार व्यक्त किया था। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने समझाया कि एक डॉक्टर के लिए मरीज की सामाजिक स्थिति, विश्वास या परिस्थितियां मायने नहीं रखनी चाहिए।

मानवता ही चिकित्सा का असली आधार

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पूर्व सीजेआई ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर में केवल एक ही पहचान मायने रखती है और वह है 'एक इंसान जिसे आपकी जरूरत है'। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे मरीज कोई कैदी हो या मंत्री, संत हो या पापी, डॉक्टर को बिना किसी पूर्वाग्रह के इलाज करना चाहिए। उन्होंने डॉ. एम एस रावल के योगदान का भी जिक्र किया, जिन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान सीमित संसाधनों के बावजूद कई सैनिकों की जान बचाई थी।

भावुक होते हुए चंद्रचूड ने अपनी बेटी के इलाज का व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया, जिसे 'नेमालाइन मायोपथी' नामक बीमारी है। उन्होंने बताया कि कैसे शिमला में गंभीर स्थिति के बाद चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर (PGIMER) के डॉक्टरों ने उनकी बेटी की जान बचाई। इसी दौरान उन्होंने एक दुखद घटना का जिक्र किया, जिसमें नोएडा के एक युवा डॉक्टर की ड्रग ओवरडोज से मौत हो गई थी।

उन्होंने डॉक्टरों को चेतावनी देते हुए कहा कि दूसरों का ख्याल रखते समय वे अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने युवा डॉक्टरों से सवाल किया कि क्या वे ठीक हैं और क्या कोई ऐसी बात है जो उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने मेडिकल प्रोफेशनल्स से अपनी भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर ध्यान देने और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की पुरजोर अपील की।

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