टैलेंट मोबिलिटी की साख को कुछ लोगों की हरकतें कर सकती हैं नुकसान: विदेश सचिव विक्रम मिस्री

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं के पलायन और रोजगार (टैलेंट मोबिलिटी) को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि इस पूरे इकोसिस्टम की विश्वसनीयता कुछ गिने-चुने लोगों की गलतियों या गलत इरादों की वजह से खतरे में पड़ सकती है। मिस्री ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय भर्ती प्रक्रिया में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही का होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी स्तर पर धोखाधड़ी या शोषण न हो।
राष्ट्रीय राजधानी में 'ग्लोबल स्किल्स मोबिलिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (GSMAI) के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए विदेश सचिव ने कहा कि जब हम टैलेंट मोबिलिटी की बात करते हैं, तो हम असल में उन इंसानों की बात कर रहे होते हैं जिनके सपने और रोजी-रोटी दांव पर होती है। उन्होंने आगाह किया कि विदेशी नौकरियों की बढ़ती मांग के बीच गलत जानकारी और स्किल्स के तालमेल की कमी से युवाओं को भारी निराशा हो सकती है।
धोखाधड़ी और शोषण के प्रति किया आगाह
विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय भर्ती में तीन बड़े जोखिम हैं: शोषण, धोखाधड़ी और स्किल्स का मिसमैच। उन्होंने कहा, "आप जिन लोगों के साथ काम कर रहे हैं, वे जीते-जागते इंसान हैं। यह जरूरी है कि अधिक मांग के कारण शोषण न बढ़े, गलत जानकारी के कारण धोखाधड़ी को बढ़ावा न मिले और स्किल्स की कमी की वजह से लोगों को निराशा न हो। दुर्भाग्य से, आज की दुनिया में हमने इन तीनों चीजों को होते देखा है।"
उन्होंने GSMAI से अपील की कि वे अपने मानक इतने ऊंचे रखें कि टैलेंट मोबिलिटी भारत के लिए 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) बनने के बजाय देश की समृद्धि का जरिया बने।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने अपने 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM) प्रोग्राम से कुछ बड़ी आईटी कंपनियों को निलंबित कर दिया है। इन कंपनियों में इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने संघीय जांचों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।
इस मामले पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि PERM प्रोग्राम और H-1B वीजा प्रोग्राम अलग-अलग हैं। इस निलंबन से मौजूदा H-1B वीजा धारकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन संबंधित कंपनियों के कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि टैलेंट मोबिलिटी भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे इनोवेशन और उत्पादकता बढ़ती है, और वाशिंगटन द्वारा उठाए गए हालिया कदम दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाते हैं।