दिल्ली की जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या पांच साल के उच्चतम स्तर पर, RTI में खुलासा
RTI से खुलासा: दिल्ली की जेलों में 766 विदेशी कैदी हैं, जिनमें से 94% अभी ट्रायल पर हैं।

देश की राजधानी दिल्ली की जेलों में बंद विदेशी नागरिकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। एक हालिया RTI (सूचना का अधिकार) खुलासे के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक दिल्ली की जेलों में कुल 766 विदेशी कैदी बंद हैं। यह संख्या पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है, जो जेल प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन 766 विदेशी कैदियों में से केवल 37 लोग ऐसे हैं जिन्हें अदालत ने दोषी करार दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि करीब 94 प्रतिशत विदेशी कैदी अभी 'अंडरट्रायल' (विचाराधीन) हैं, यानी उनके मामलों में अभी फैसला आना बाकी है और वे लंबे समय से जेल में इंतजार कर रहे हैं।
रिहाई की प्रक्रिया और मानवीय आधार पर फैसले
जहाँ एक तरफ विदेशी कैदियों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर अदालतों ने कुछ मानवीय आधारों पर रिहाई के रास्ते खोले हैं। 24 फरवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बांग्लादेशी कैदी को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया, जिसने 21 साल से ज्यादा की सजा काट ली थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर समय से पहले रिहाई से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी तरह, 9 फरवरी 2026 को तिहाड़ जेल से उम्रकैद की सजा काट रहे 26 कैदियों की समयपूर्व रिहाई को मंजूरी दी गई, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल था जिसे वापस उसके देश भेजा जाना है।
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 28 अक्टूबर 2026 को शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर एक व्यापक नीति तैयार करें। इस नीति के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के या गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदियों को मानवीय आधार पर रिहा किया जा सकेगा, और यह नियम योग्य विदेशी नागरिकों पर भी लागू होगा।
हालांकि, इन कानूनी राहतों के बावजूद विदेशी कैदियों के लिए जेल जीवन मुश्किलों भरा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले भी इस बात पर चिंता जताई है कि जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं की कमी है, जिसकी वजह से ये कैदी अपने घर और दूतावासों से संपर्क नहीं कर पाते। अपनों से दूर और भाषा की बाधा के बीच ये विदेशी नागरिक कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।