दिल्ली के बिजनेसमैन का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट, उत्तर-पश्चिम दिल्ली में पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन

दिल्ली के विकासपुरी निवासी 47 वर्षीय बिजनेसमैन चंचल यादव के लिए जिंदगी अब एक नई शुरुआत लेकर आई है। करीब 11 साल तक दिल की गंभीर बीमारी से जूझने के बाद, उनका सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है। यह सर्जरी शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल में हुई, जो उत्तर और पश्चिम दिल्ली के इलाके में अपनी तरह का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट ऑपरेशन है।
चंचल यादव की तकलीफों का सिलसिला साल 2015 में शुरू हुआ था, जब महज 37 साल की उम्र में उन्हें हल्का दिल का दौरा पड़ा। इसके तीन महीने बाद जांच में पता चला कि उनके दिल को काफी नुकसान पहुंच चुका है। हालत इतनी बिगड़ गई कि 2023 में उनका नाम ट्रांसप्लांट की वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। जून 2026 में जब उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, तब उनका दिल अपनी सामान्य क्षमता के बहुत छोटे हिस्से पर काम कर रहा था।
रोहतक के युवक के दिल ने दिया नया जीवन
इस जटिल सर्जरी को 17 सितंबर 2026 को अंजाम दिया गया। चंचल यादव को जो दिल मिला, वह हरियाणा के रोहतक के एक 41 वर्षीय व्यक्ति का था, जिनकी एक सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। अंगदान की इस प्रक्रिया के तहत दिल को करीब 100 किलोमीटर दूर से अस्पताल लाया गया। यह पूरी प्रक्रिया नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO) की निगरानी में पूरी हुई।
अस्पताल के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. नरेश कुमार गोयल ने बताया कि चंचल यादव हार्ट फेलियर की उस गंभीर स्थिति में पहुंच चुके थे, जहां अब दवाइयां या अन्य सामान्य इलाज काम नहीं कर रहे थे। ऐसे में ट्रांसप्लांट ही उनकी जान बचाने का एकमात्र रास्ता था। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश कुमार मित्तल ने टीम का नेतृत्व करते हुए इस सर्जरी को सफल बनाया।
भारत में दिल के मरीजों की संख्या और अंगों की कमी एक बड़ी चुनौती है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 50 हजार लोग दिल के ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि साल भर में केवल 225 के करीब ऐसे ऑपरेशन हो पाते हैं। दिल्ली में साल 2024 में कुल 14 हार्ट ट्रांसप्लांट दर्ज किए गए थे।
अपनी नई जिंदगी पाकर चंचल यादव ने मेडिकल टीम और डोनर के परिवार का दिल से शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि डोनर परिवार की सहमति की वजह से ही उन्हें जीवन का यह दूसरा मौका मिला है।