फिरोजाबाद में फ्लोराइड वाले पानी से बच्चों में कुपोषण, गर्भवती महिलाएं प्रभावित

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में ग्राउंड वाटर में फ्लोराइड कंटामिनेशन खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। इस समस्या के कारण कमजोर और कुपोषित बच्चों का जन्म हो रहा है, जो एनसीआर और आसपास के इलाकों के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय है।
• जिला बाल विकास और पोषण विभाग के अनुसार, जुलाई 2026 में 2,354 बच्चे कुपोषित और 559 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए हैं।
• जून 2026 में यह आंकड़ा थोड़ा ज्यादा था, जिसमें 2,542 कुपोषित और 667 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे दर्ज किए गए थे।
गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम की कमी
शिकोहाबाद ज्वॉइंट हॉस्पिटल के सीएमएस और न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (NRC) के हेड डॉ. रमेश चंद्र केशव ने बताया कि गर्भवती महिलाओं द्वारा फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से उनके शरीर में कैल्शियम कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप कम वजन वाले और कमजोर बच्चों का जन्म होता है, और जन्म के बाद सही पोषण न मिलने से यह समस्या और बढ़ जाती है।
जल जीवन मिशन के एक सर्वे से पता चला है कि फिरोजाबाद के 790 में से 351 गांवों के ग्राउंड वाटर में अत्यधिक फ्लोराइड है। कई इलाकों में फ्लोराइड की मात्रा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय मानक 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से काफी ज्यादा है।
असर प्रभावित इलाके और सरकारी योजनाएं
इस समस्या से मुख्य रूप से टूंडला, नरखी, हाथवंत, एका और जसराना ब्लॉक के साथ-साथ एटा जिले से जुड़े कुछ गांव प्रभावित हैं। जून 2026 की टूंडला ब्लॉक की एक स्टडी में सामने आया कि 28% ग्राउंड वाटर सैंपल फ्लोराइड के लिए तय सुरक्षित लिमिट से ज्यादा थे।
पानी की इस समस्या को दूर करने के लिए अगस्त 2023 में 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश के साथ 'हर घर नल से जल' योजना शुरू की गई थी, लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी और पूरा समाधान नहीं मिल पाया है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव और रिसर्च
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 3 ppm के आसपास फ्लोराइड लेवल होने पर डेंटल फ्लोरोसिस हो सकता है, जिससे दांतों पर भूरे धब्बे या सफेद निशान पड़ जाते हैं। लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में फ्लोराइड के संपर्क में रहने से हड्डियों में अकड़न और विकृति यानी स्केलेटल फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
रिसर्च से यह भी पता चलता है कि पानी में हाई फ्लोराइड लेवल बच्चों के कॉग्निटिव डेवलपमेंट और आईक्यू (IQ) पर बुरा असर डाल सकता है (Source)।