CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, 7 दिन में दर्ज कीं 27 FIR

Kittu Kumari9 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, 7 दिन में दर्ज कीं 27 FIR

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। पिछले सात दिनों के भीतर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 27 FIR दर्ज की हैं। जंतर मंतर और संसद मार्ग जैसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा घेरा मजबूत करने और बैरिकेडिंग लगाने के बावजूद जब प्रदर्शनकारी नियमों का उल्लंघन कर आगे बढ़े, तो पुलिस ने नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए यह बड़ी कार्रवाई की है।

पुलिस की इस कानूनी रणनीति में सबसे ज्यादा जोर 'साझा आपराधिक दायित्व' (Joint Criminal Liability) पर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) का इस्तेमाल कुल 27 में से 22 FIR में किया गया है। इसका मतलब यह है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग व्यक्तियों के बजाय एक समूह के रूप में देखा, जिन्होंने एक साझा इरादे के साथ कानून तोड़ा। इस धारा के तहत समूह के सभी सदस्यों को समान रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।

इन धाराओं के जरिए कसा गया शिकंजा

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पुलिस ने केवल एक धारा का सहारा नहीं लिया, बल्कि प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के हिसाब से अलग-अलग कानूनी प्रावधान लगाए:

  • धारा 223(a) BNS: इसका इस्तेमाल 18 FIR में किया गया, क्योंकि हाई-सिक्योरिटी जोन में धारा 163 (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। बिना अनुमति के इकट्ठा होने वालों पर यह धारा लगाई गई।
  • धारा 221 BNS: 17 मामलों में यह धारा लगाई गई, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने सरकारी काम में बाधा डाली और रास्तों को ब्लॉक किया।
  • धारा 132 BNS: जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच शारीरिक टकराव हुआ, तो 17 FIR में सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और उन्हें ड्यूटी से रोकने की धारा जोड़ी गई।
  • सार्वजनिक संपत्ति नुकसान: सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और विरूपण (PDPP/DPDP Act) की धारा 3 के तहत 9 मामले दर्ज किए गए।

इसके अलावा, पुलिस ने कुछ गंभीर मामलों में BNS की अन्य सख्त धाराएं भी लगाई हैं। इनमें जानबूझकर चोट पहुँचाना (धारा 115(2)), गलत तरीके से रोकना (धारा 126(2)), अवैध रूप से बंधक बनाना (धारा 127(2)) और महिलाओं के खिलाफ बल प्रयोग (धारा 74/75) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। कुछ मामलों में खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल (धारा 118(1)) का जिक्र भी किया गया है, जो इस बात को दर्शाता है कि प्रदर्शन के दौरान हालात कितने तनावपूर्ण रहे होंगे।

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