जामिया यूनिवर्सिटी विरोध: कैंपस में घुसने और उकसाने के आरोप में 3 सांसदों पर FIR

जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बीच 3 सांसदों पर FIR दर्ज हुई है। पढ़ें पूरी खबर।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जामिया यूनिवर्सिटी विरोध: कैंपस में घुसने और उकसाने के आरोप में 3 सांसदों पर FIR

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनावों की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत पर तीन सांसदों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। इनमें कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबउल्लाह नादवी शामिल हैं। इन सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति के कैंपस में प्रवेश किया और छात्रों को उकसाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। यह मामला जामिया नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया गया है।

दरअसल, यूनिवर्सिटी के छात्र साल 2005-2006 के बाद से रुके हुए छात्र संघ चुनावों को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ था, जो बाद में भूख हड़ताल में बदल गया। इसी बीच कैंपस की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर' जैसे विवादित नारे लिखे मिलने से तनाव और बढ़ गया। छात्रों का दावा है कि यह उनके आंदोलन को बदनाम करने की साजिश है। छात्रों ने एक युवक को भी पकड़ा, जिसके पास कथित तौर पर अर्धसैनिक बल की वर्दी और आईडी कार्ड मिला, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

कैंपस में तनाव और ऑनलाइन हुईं कक्षाएं

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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से कई कड़े कदम उठाए हैं। कैंपस के कई गेट और सेंट्रल लाइब्रेरी को बंद कर दिया गया है, साथ ही सभी कक्षाओं को अगले आदेश तक ऑनलाइन कर दिया गया है। यह फैसला 24 अक्टूबर को भूख हड़ताल स्थल पर छात्रों और स्टाफ के बीच हुई झड़प के बाद लिया गया। इसके अलावा, जिन इलाकों में विवादित नारे लिखे गए थे, वहां के सीसीटीवी कैमरों को भी क्षतिग्रस्त पाया गया है, जिसकी जांच जारी है।

वहीं, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। SFI का कहना है कि गेट नंबर 7 के बाहर मशाल जुलूस निकाल रहे सैकड़ों छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया और इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं।

प्रशासन ने हालांकि 23 अक्टूबर को एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसे 20 दिसंबर तक छात्र संघ का संविधान तैयार करना है। लेकिन छात्र इस बात से संतुष्ट नहीं हैं और उनकी मांग है कि चुनाव की तारीखों का आधिकारिक नोटिफिकेशन तुरंत जारी किया जाए। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि 2006 की हिंसक घटनाओं और लंबे कानूनी विवादों के कारण वे चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं।

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