यौन उत्पीड़न मामला: पूर्व जेएनयू प्रोफेसर और सांसद बिमोल अकोइजाम पर FIR दर्ज

दिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जो महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित हैं।
गंभीर आरोपों के बाद यूनिवर्सिटी ने की थी बर्खास्तगी
यह कानूनी कार्रवाई उस समय हुई जब यूनिवर्सिटी ने 9 अक्टूबर, 2026 को अकोइजाम को उनके पद से हटा दिया था। दरअसल, मई 2026 में कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद यूनिवर्सिटी की आंतरिक समिति ने जांच की। समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिसमें बताया गया कि प्रोफेसर अकोइजाम कक्षाओं और वाइवा के दौरान यौन संकेत देते थे। साथ ही, उन पर अपने कैंपस आवास पर छात्राओं को बुलाने और बेहतर ग्रेड्स के बदले यौन संबंधों की पेशकश करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। यूनिवर्सिटी ने यूजीसी नियमों और केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत उन्हें बर्खास्त किया है।
दूसरी ओर, अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को एक 'विच हंट' (शिकार अभियान) और मीडिया ट्रायल करार दिया है। उन्होंने जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित के उन दावों को भी चुनौती दी है, जिनमें कहा गया था कि उन्हें 300 ईमेल भेजे गए थे; अकोइजाम का कहना है कि उन्हें केवल 43 ईमेल मिले थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने समय-समय पर अपना पक्ष रखा और गवाह भी पेश किए। अब वे इस फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देने की तैयारी में हैं।
इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने इस मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। वहीं, जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन (JNUTA) ने इस पूरी अनुशासनात्मक प्रक्रिया में गोपनीयता के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों पर चिंता जताई है।