यौन उत्पीड़न मामला: कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई 11 छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन मांगों और अभद्र टिप्पणियों जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
यह पूरा मामला जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की आंतरिक समिति (IC) की जांच के बाद सामने आया है। POSH एक्ट, 2013 के तहत गठित इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर JNU ने 9 अक्टूबर, 2026 को प्रोफेसर अकोईजम को उनकी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया था। कुलपति शांतिश्री डी पंडित ने पुष्टि की है कि समिति ने उन्हें 'रिपीट ऑफेंडर' (बार-बार अपराध करने वाला) पाया है और उनके खिलाफ 2014-2015 के समय से ही शिकायतें मौजूद थीं।
पदों का दुरुपयोग और गंभीर आरोप
छात्राओं का आरोप है कि प्रोफेसर अकोईजम ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अच्छे नंबरों के बदले यौन favors मांगे, छात्रों से उनके निजी रिश्तों के बारे में पूछताछ की और उन्हें यौन रूप से स्पष्ट सामग्री (sexually explicit material) दिखाई।
दूसरी ओर, इनर मणिपुर के सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को एक "विच हंट" (राजनीतिक साजिश) करार दिया है। अकोईजम का दावा है कि JNU ने उनकी पहचान उजागर कर POSH एक्ट की धारा 16 का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभी तक बर्खास्तगी का आधिकारिक आदेश या समिति की पूरी रिपोर्ट नहीं मिली है और वह इसके खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मणिपुर के मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने अकोईजम से लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की मांग की है, जबकि भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर सांसद को बचाने का आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी से निलंबित करने की मांग की है। दिल्ली महिला आयोग (DCW) और ABVP ने यूनिवर्सिटी के फैसले का समर्थन किया है, वहीं भाजपा महिला मोर्चा ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।