यमुना अथॉरिटी मार्च के दौरान बवाल, पुलिस ने 150 से ज्यादा किसानों को लिया हिरासत में
ग्रेटर नोएडा में यमुना अथॉरिटी की ओर बढ़ रहे किसानों और पुलिस के बीच झड़प, 150 से अधिक हिरासत में। जानें क्या हैं किसानों की मांगें।

ग्रेटर नोएडा में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। यमुना अथॉरिटी कार्यालय की ओर कूच कर रहे करीब 150 किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें परी चौक के पास ही रोक लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया।
जानकारी के मुताबिक, परी चौक सेक्टर में ही 100 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं, जबकि आसपास के इलाकों से करीब 50 और लोगों को पकड़ा गया। प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए गौतम बुद्ध नगर में 10 से 20 अक्टूबर तक BNSS की धारा 163 लागू की थी। इस प्रदर्शन का नेतृत्व सुखबीर खलीफा, रूपेश वर्मा, सोबरन प्रधान और चरण सिंह जैसे कई किसान नेताओं ने किया।
मांगों को लेकर टकराव और प्रशासन के साथ बातचीत
किसान मुख्य रूप से 10% विकसित प्लॉट, मुआवजे में बढ़ोतरी और भूमि अधिग्रहण के नए कानूनों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) ने पुलिस की इस कार्रवाई को 'बर्बर' करार दिया है और मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं, राकेश टिकैत ने भी किसानों का समर्थन करते हुए अधिकारियों द्वारा बातचीत न करने की आलोचना की।
तनाव बढ़ने के बाद 22 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन (कृषक) के एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे तक बातचीत की। इस बैठक में यमुना अथॉरिटी के एसीईओ राजेश कुमार सिंह, नितिन मदन और डीसीपी एसके सिंह समेत कई बड़े अधिकारी शामिल थे। चर्चा के दौरान 10% आवासीय प्लॉट, बैक-लीज मुद्दे, 64.7% अतिरिक्त मुआवजे और रोजगार के अवसरों पर बात हुई।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने अपनी प्रस्तावित 23 अक्टूबर की 'महापंचायत' को एक महीने के लिए टालने का फैसला किया है। किसानों का कहना है कि यदि एक महीने के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन करेंगे।