फरीदाबाद: विजयादशमी असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक: दत्तात्रेय होसबाले

फरीदाबाद के विवेकानंद नगर स्थित केशव बस्ती में मंगलवार को फरीदाबाद विजयादशमी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। एनएच-4 एयर फ़ोर्स मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्र वंदना और अनुशासित पथ संचलन के साथ उत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने विजयादशमी के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है। होसबाले ने जोर देकर कहा कि यह दिन समाज में साहस, अनुशासन, एकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को याद दिलाया कि राष्ट्र और समाज के प्रति उनके दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन पर जोर
दत्तात्रेय होसबाले ने संघ की स्थापना के उद्देश्यों और राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम, विद्यार्थी परिषद, विद्या भारती और सेवा भारती जैसे सेवा प्रकल्पों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे ये संगठन समाज के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने संघ के शारीरिक, बौद्धिक और संगठनात्मक कार्यों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
वहीं, सह विभाग कार्यवाह त्रिलोक ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए 'पंच परिवर्तन' के विषयों पर बात की। उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्यों के पालन को जीवन में उतारने का आह्वान किया, ताकि राष्ट्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान आपातकाल के समय संघ पर लगे प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए यह बताया गया कि कठिन समय में भी स्वयंसेवकों ने अपना संगठनात्मक कार्य जारी रखा। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संगठन के बारे में राय बनाने से पहले तथ्यों और प्रमाणों को देखना जरूरी है। इस पूरे महोत्सव का मूल संदेश राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना रहा।
इस अवसर पर जयकिशन, संजय, राकेश, किशन और देव प्रसाद सहित संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक मौजूद रहे।