CJP प्रदर्शन का असर: दिल्ली बॉर्डर पर फरीदाबाद पुलिस का हाई अलर्ट, सुरक्षा सख्त

Kittu Kumari11 October 20262 min read0 viewsNCR
CJP प्रदर्शन का असर: दिल्ली बॉर्डर पर फरीदाबाद पुलिस का हाई अलर्ट, सुरक्षा सख्त

दिल्ली के जंतर मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के चलते फरीदाबाद पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। राजधानी की सीमाओं और मुख्य रास्तों पर लगातार दूसरे दिन कड़ी निगरानी रखी गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या भीड़ के जमावड़े को रोका जा सके। फरीदाबाद दिल्ली बॉर्डर अलर्ट के तहत पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि शहर की शांति बनी रहे।

सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए अधिकारियों ने दिल्ली से सटे बॉर्डर पर सात अलग-अलग चेकपोस्ट बनाए हैं। यहां आने-जाने वाले वाहनों की गहनता से जांच की जा रही है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भी लगातार मॉनिटरिंग कर रही है ताकि अफवाहों या किसी संभावित हंगामे की सूचना समय रहते मिल सके। राहत की बात यह रही कि इतनी सख्ती के बावजूद यातायात सामान्य रहा और सड़कों पर कोई जाम नहीं देखा गया।

प्रदर्शन की वजह और कानूनी कार्रवाई

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यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) में गड़बड़ियां हुई हैं। इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अब तक 20 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोप भी शामिल हैं।

मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब हिरासत में लिए गए CJP नेताओं—अभिजित डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली कार्यकारी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 23 घंटे बाद रिहा कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर जमानत दी है। वहीं, पार्टी नेतृत्व ने 12 अक्टूबर को एक नए विरोध मार्च की अनुमति लेने के लिए पुलिस स्टेशन जाने की योजना बनाई है।

प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की है। इस पूरे मामले ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान भी खींचा है, जहां कानून-व्यवस्था और नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए विशेष सुनवाई की गई। दूसरी ओर, फरीदाबाद के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने इस राजनीतिक विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की कोई योजना नहीं है।

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