फरीदाबाद: अरावली में कूड़ा डालने की योजना के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल, धरना जारी

फरीदाबाद के भाखरी इलाके में पर्यावरण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अरावली के बेहद संवेदनशील हरित क्षेत्र में नगर निगम द्वारा कूड़ा डालने और कूड़ा घर बनाने की योजना के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग पर भाखरी के पास सैकड़ों ग्रामीण और शहरी निवासी बेमियादी धरने पर बैठ गए हैं, ताकि अपनी प्रकृति को विनाश से बचा सकें।
इस विरोध प्रदर्शन में भाखरी गांव, सैनिक कॉलोनी और अचीवर सोसाइटी के पुरुष और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि अरावली जैसे प्राकृतिक क्षेत्र में कचरा डंप करने से न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी, बल्कि भूजल के दूषित होने से पूरे इलाके के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराएगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से वे अवैध रूप से कचरा डालने का विरोध कर रहे हैं।
प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति
मामला तब और गरमा गया जब कुछ दिन पहले वार्ड-19 के पार्षद जगत सिंह और अन्य प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बलपूर्वक धरना स्थल से हटा दिया था। हालांकि, यह कार्रवाई लोगों के गुस्से को शांत करने के बजाय और बढ़ा गई और ग्रामीण दोबारा एकजुट होकर सड़क पर उतर आए हैं। उनकी मांग स्पष्ट है—अरावली में कूड़ा डालने की योजना को पूरी तरह रद्द किया जाए।
दूसरी ओर, नगर निगम और जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए मंथन कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो दशहरा के बाद इस मामले में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। वहीं, इलाके में यह चर्चा भी तेज है कि प्रशासन एक बार फिर प्रदर्शनकारियों को हटाने की तैयारी कर रहा है, जिससे पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखे टकराव की आशंका है।
नगर निगम के अधीक्षण अभियंता ओमवीर सिंह ने इस स्थिति पर कहा कि फिलहाल लोगों को हटाने का कोई नया फैसला नहीं लिया गया है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक डंपिंग यार्ड की योजना नहीं हटती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब सबकी नजरें दशहरा के बाद आने वाले प्रशासनिक फैसले पर टिकी हैं।