यूनिवर्सिटी एडमिशन के लिए फर्जी PwD सर्टिफिकेट बनाने वाला गैंग पकड़ाया, 9 गिरफ्तार

Kittu Kumari9 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
यूनिवर्सिटी एडमिशन के लिए फर्जी PwD सर्टिफिकेट बनाने वाला गैंग पकड़ाया, 9 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलाने के लिए फर्जी Persons with Disabilities (PwD) सर्टिफिकेट बना रहा था। इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले गिरोह के 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से 27 जाली सर्टिफिकेट बरामद हुए हैं। यह पूरा खेल योग्य उम्मीदवारों के हक को मारकर गलत तरीके से दाखिला दिलाने के लिए चलाया जा रहा था।

पुलिस की जांच के मुताबिक, यह रैकेट बहुत ही शातिर तरीके से काम कर रहा था। गिरोह के सदस्य Unique Disability ID (UDID) पोर्टल का इस्तेमाल कर रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि आधार कार्ड के विवरण को बदलने के लिए AI-आधारित टूल्स का सहारा लिया गया, ताकि छात्रों के निवास स्थान को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बदायूं, बरेली और गोरखपुर जैसे जिलों के रूप में दिखाया जा सके। इन फर्जी दस्तावेजों की मदद से दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में JBT और B.Tech जैसे कोर्स में एडमिशन लिए जा रहे थे।

रिश्वत के खेल में शामिल थे सरकारी कर्मचारी और डॉक्टर

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इस घोटाले में एक सर्टिफिकेट की कीमत 20,000 से 30,000 रुपये के बीच तय की गई थी। पोर्टल पर फर्जी मेडिकल दस्तावेज अपलोड किए जा रहे थे, जिसमें सरकारी मेडिकल कार्यालयों के अंदर बैठे कुछ लोगों की मिलीभगत थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मुख्य सूत्रधार ललित कुमार (फरीदाबाद), एजुकेशन कंसल्टेंट रोशन कुमार (नोएडा), और बरेली का कुलदीप शामिल हैं।

पुलिस ने इस मामले में बड़े नामों को भी दबोचा है, जिनमें डिसेबिलिटी बोर्ड के सदस्य डॉ. लक्ष्मी कांत सक्सेना और सिद्धार्थनगर के सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर जयप्रकाश शुक्ला शामिल हैं। इसके अलावा देवरिया CMO ऑफिस के जूनियर असिस्टेंट धीरेंद्र कुमार पांडे, सुरेंद्र रस्तोगी, शेर सिंह सोलंकी और आदेश सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है।

डीसीपी (नॉर्थ) निहारिका भट्ट और एसीपी विशेष धत्तरवाल की देखरेख में यह कार्रवाई की गई। पुलिस अब उन छात्रों की तलाश कर रही है जिन्होंने इन फर्जी सर्टिफिकेट्स के जरिए एडमिशन लिया है। साथ ही, गोरखपुर निवासी चंदन सिंह यादव की तलाश जारी है, ताकि इस पूरे घोटाले की गहराई तक पहुंचा जा सके।

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